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शुक्रवार, 29 दिसंबर, 2006 को 16:04 GMT तक के समाचार

'क्लोन जानवरों के माँस और दूध सुरक्षित'

अमरीकी खाद्य नियामक एजेंसी ने अपने एक फ़ैसले में कहा है कि क्लोनिंग से तैयार किए गए जानवरों के दूध और माँस मनुष्य के लिए पूरी तरह से सुरक्षित हैं.

द फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी एफडीए ने लिखित फ़ैसले में कहा है कि क्लोनिंग से तैयार बछड़े, सूअर और बकरी से मिलने वाले खाद्य पदार्थ भी उतने ही सुरक्षित हैं जितने हमारे आम भोजन.

एफडीए ने यह सलाह पाँच वर्षों के अध्ययन के बाद दी है और इसे क्लोनिंग से तैयार किए गए जानवरों के उत्पाद को अमरीकी सुपर मार्केटों में बेचने की अनुमति देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

हालांकि इस संबंध में अंतिम फ़ैसला लिए जाने से पहले बड़े पैमाने पर लोगों से विचार-विमर्श किया जाएगा.

उधर इस नीति के विरोधियों का कहना है कि ज्यादातर अमरीकी जानवरों की क्लोनिंग के ख़िलाफ हैं.

एफडीए ने अपने अध्ययन में बछड़े, सूअर और बकरी के माँस और दुग्ध उत्पादों को शामिल किया था लेकिन भेड़ को इसमें शामिल नहीं किया गया.

अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया है कि क्लोनिंग से तैयार जानवरों के उत्पादों और पारंपरिक उत्पादों में अंतर करना तक मुश्किल है.

एफडीए का कहना है कि इसका यह अर्थ निकाला जाना चाहिए कि वह उत्पादों पर अलग-अलग लेबल लगाने की सिफारिश नहीं करेगी.

एफडीए के एक अधिकारी ने कहा, '' लेबलिंग पर तब तक कोई अंतिम फ़ैसला नहीं लिया जाएगा जब तक कि लोगों से विचार-विमर्श करने के लिए दी गई मोहलत खत्म न हो जाए.''

'बुरा फ़ैसला'

दरअसल, क्लोनिंग में जीव का हूबहू प्रतिरूप तैयार किया जाता है. वैज्ञानिक एक डिम्ब कोशिका से डीएनए निकालते हैं और इसके बाद यह सामान्य भ्रूण की तरह विकसित होने लगता है.

वर्ष 1996 में पहली बार भेड़ की क्लोनिंग की गई थी और डॉली अस्तित्व में आई थी.

अगर यह फ़ैसला अंतिम रूप से लागू हो जाता है तो अमरीका क्लोनिंग के जरिए तैयार जानवरों को उत्पाद को अनुमति देने वाला पहला देश हो जाएगा.

जबकि इस तर्क के विरोधी उपभोक्ता समूह एफडीए के दिशा-निर्देश को लेकर उत्साहित नहीं है.

कंज़्यूमर फेडरेशन ऑफ अमरीका की कैरोल फोरमैन ने एफडीए के आदेश को '' काफ़ी ख़राब फ़ैसला'' करार दिया है.

कैरोल कहती हैं, '' हम लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे एफडीए, कांग्रेस के सद्स्यों को लिखे कि नियामक एजेंसी अपने फ़ैसले को वापस ले.''