गुरुवार, 07 दिसंबर, 2006 को 07:13 GMT तक के समाचार
अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का कहना है कि उसे मंगल ग्रह की सतह पर पिछले कुछ वर्षों में पानी बहने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं.
नई खोज से उन मान्यताओं को बल मिला है जिनमें कहा गया था कि मंगल ग्रह पर जीवन की प्रबल संभावनाएं हैं.
नासा को मिली तस्वीरों से मंगल पर कई स्थानों पर नालियाँ दिख रही हैं, जिससे पता चलता है कि शायद पिछले कुछ वर्षों में वहाँ सतह पर पानी बहा हो.
लेकिन कुछ वैज्ञानिकों की राय इससे जुदा है और उनका मानना है कि सतह पर नालियों के रूप में ये ताज़ा कटाव द्रवित कार्बन डाइऑक्साइड से हुए हैं.
नासा के मार्स ग्लोबल सर्वेयर यान यानी एमजीएस ने मंगल ग्रह की सतह पर नालियों और छोटी-छोटी खाइयों की तस्वीरें खींची हैं और वैज्ञानिकों का मानना है कि इनका निर्माण पिछले कुछ वर्षों में पानी के तेज बहाव की वजह से हुआ है.
जीवन की संभावना
सेन डिएगो स्थित अंतरिक्ष प्रणाली ने एमजीएस के ज़रिए मंगल पर पानी की हलचल की ताजा जानकारी के लिए सतह पर मौजूद हजारों नालियों की तस्वीरें फिर से खींचने का फ़ैसला किया है.
मूल रूप से वर्ष 1999 और 2001 में खींची गई तस्वीरों और दोबारा 2004 और 2005 में खींचे गए चित्रों में अंतर है और अध्ययन से पता चला है कि नियमित रूप से पानी बहने के कारण ही इन गड्ढों की दीवारों पर ये बदलाव आया है.
कैलीफोर्निया तकनीकी संस्थान में उपग्रह विज्ञान के सहायक प्रोफेसर ओडेड एहर्नसन का कहना है कि मंगल पर पानी की गतिविधि की ताजा खोज वहाँ जीवन होने की एक संभावित व्याख्या भर है.
उन्होंने कहा कि इस बात का पता लगाने के लिए और अधिक अध्ययन की ज़रूरत है कि कहीं सतह पर बने गड्ढे और नालियाँ पानी बहने से नहीं बल्कि वहां मौजूद धूल उड़ने से तो नहीं बनी हैं.
मार्स ग्लोबल सर्वेयर का पिछले माह अचानक पृथ्वी से रेडियो संपर्क टूट गया था.
यह यान 1996 से मंगल का चक्कर लगा रहा है. वैज्ञानिकों ने इसके दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका जताई है.