रविवार, 26 नवंबर, 2006 को 13:13 GMT तक के समाचार
एक शोध में कहा गया है कि बच्चों का मोटापा उनके पैरों को हानि पहुँचा सकता है. साथ ही यह चलने-फिरने में दिक्कत पैदा कर सकता है.
सोसाइटी ऑफ़ पॉडियाटरिस्ट एंड किरॉपोडिस्ट यानि बच्चों के पैरों का शोध करनेवाली संस्था ने अपने अध्ययन में पाया गया कि मोटे बच्चों के पैर ज़्यादा बड़े और चौड़े होते हैं.
मोटे बच्चों को संतुलन बनाने में समस्या होती है और वे थोड़ा धीरे चलते हैं.
विशेषज्ञों की राय है कि मोटापे के प्रभाव से बच्चों को पैरों और कमर की बीमारी हो सकती है.
हर पैर में 26 हड्डियों और 19 मांसपेशियों होती है जो चलने और दौड़ने पर मिलने वालों झटकों को कम करती हैं.
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक वज़न और मोटापा बच्चों के कोमल और मजबूत हो रहे पैरों को हानि पहुँचा सकता है जिससे बच्चों के पैर टेढ़े-मेढ़े भी हो सकते हैं.
नौ से 12 साल की उम्र तक के बच्चों पर किए अध्ययन में पाया गया कि मोटे बच्चों के पैर सामान्य बच्चों के पैरों की तुलना में 15 मिलीमीटर ज़्यादा लंबे और सात मिलीमीटर अधिक चौड़े होते हैं.
इस अध्ययन में आधे से अधिक मोटे बच्चों में संतुलन की समस्या भी पाई गई.
ये अध्ययन करने वाले ईस्ट लंदन विश्वविद्यालय के डॉ स्टीवर्ट मौरिसन का कहना है," मोटे बच्चे चलते समय स्थिर नहीं होते और उन्हें चलने में दिक्कत होती है."
उन्होंने कहा, " पिछले शोधों से पता चला है कि मोटे बच्चों के कसरत करने पर उनका मोटापा ठीक हो सकता है. लेकिन इस अध्ययन में यह सामने आया है कि मोटे बच्चे शारीरिक गतिविधियों में ठीक से हिस्सा ही नहीं ले पाते हैं.''
विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर तो यह है कि बच्चों में मोटापा उत्पन्न होने ही न दिया जाए.