शुक्रवार, 10 नवंबर, 2006 को 19:27 GMT तक के समाचार
अमरीकी वैज्ञानिकों ने आर्सेनिक मिले पानी को शुद्ध करने का सस्ता और आसान तरीका खोज निकाला है.
इससे बांग्लादेश जैसे अल्पविकसित देशों में लाखों लोगों को फायदा होगा जो आर्सेनिक मिला पानी पीने के लिए मजबूर हैं.
अमरीकी प्रांत टेक्सास के राइस विश्वविद्यालय में शोधकर्ताओं की टीम ने पानी से आर्सेनिक निकालने के लिए आयरन ऑक्साइड के सूक्ष्म कण बनाने में सफलता हासिल की.
आर्सेनिक एक ख़तरनाक धातु है और इससे मिला पानी पीने से त्वचा रोग होने की आशंका बनी रहती है. साथ ही यह नाखूनों और दांतों पर भी बुरा असर डालता है.
इस प्रयास में नैनो टेक्नोलॉजी का सहारा लिया गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि आयरन ऑक्साइड के कणों को पानी में छोड़ दिया जाए तो वे आर्सेनिक को अपने आप से बांध लेते हैं.
इन सूक्ष्म कणों को चुंबक की मदद से एक साथ एकत्रित किया जाता है.
अग़र इस तकनीक की आधिकारिक पुष्टि हो गई तो अकेले बांग्लादेश में लगभग छह करोड़ लोगों को इसका फायदा मिलेगा जहाँ पीने के पानी में आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाई गई है.
शोध
यह शोध 'साइंस' पत्रिका में छपा है. इसमें कहा गया है कि नैनोटेक्नोलॉजी की मदद से आयरन ऑक्साइड के कणों को 12 नैनोमीटर तक छोटा किया गया. मतलब इसका आकार बाल की चौड़ाई से भी पाँच हज़ार गुना छोटा है.
इन कणों को जब पानी में मिलाया गया तब आर्सेनिक इन कणों से सट गए. इसके बाद चुंबक की सहायता से इन कणों को बाहर निकाल लिया गया.
इस प्रक्रिया के बाद पानी की फिर जाँच की गई जिससे पता चला कि वो पीने के लायक हो गया है.
शोध के सहायक लेखक डग नैटेलसन का कहना है कि ये प्रक्रिया केमिकल इंजीनियर पहले से ही अन्य कामों के लिए अपनाते रहे हैं.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "पानी को साफ़ करने के लिए चुंबकीय कणों के इस्तेमाल का विचार नया नहीं है. फ़र्क यही है कि इन कणों का आकार बेहद छोटा कर दिया गया है."