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गुरुवार, 09 नवंबर, 2006 को 22:15 GMT तक के समाचार

'ऑपर्चुनिटी' का वापस लौटना मुश्किल

मंगल ग्रह की जानकारी लेने के लिए भेजे गए रोबोट वाहन ऑपर्चुनिटी का वापस धरती पर लौटना मुश्किल लग रहा है.

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की योजना के अनुसार मंगल ग्रह पर एक गहरी खाई का पता लगाने के लिए इसकी मदद ली जाएगी.

हालाँकि उस खाई में घुसने के बाद ऑपर्चुनिटी का बाहर निकलना क़ाफी मुश्किल है.

मंगल की सतह पर स्थित खाई 'विक्टोरिया क्रेटर' की गहराई 60 मीटर है.

नासा के मार्स रोवर यानी मंगल अभियान के मुख्य वैज्ञानिक स्टीव स्क्वायर्स कहते हैं कि अग़र क्रेटर से वापसी का कोई रास्ता नहीं दिखा तब भी ऑपर्चुनिटी को उसके अंदर भेजा जाएगा.

फिर भी उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऑपर्चुनिटी को वहाँ से बाहर निकालने के सभी विकल्पों पर विचार किया जाएगा.

ऑपर्चुनिटी मंगल पर 2004 में पहुँचने के बाद कई खाइयों के बारे में जानकारी दे चुका है लेकिन विक्टोरिया क्रेटर का अध्ययन करने की चुनौती सबसे बड़ी है.

स्क्वायर्स कहते हैं कि इससे पहले इंड्योरेंस क्रेटर की खोज हुई थी जिसकी परिधि 150 मीटर थी. वो कहते हैं, "ये तो उससे छहगुना बड़ा है. हमने अंदर जाने का रास्ता तय कर लिया है लेकिन बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला है."

चुनौती

प्रोफ़ेसर स्क्वायर्स कहते हैं कि लाल ग्रह के रुप में चर्चित मंगल के बारे में और अध्ययन की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा कि मंगल की सतह से चट्टानों के नमूने को जाँच के लिए लाना वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.

स्क्वायर्स कहते हैं कि मंगल के नमूनों की धरती पर जाँच से इस बात के पक्के सबूत मिलेंगे कि वहाँ कभी जीवन था या नहीं और चट्टानों की उम्र कितनी है.