शुक्रवार, 03 नवंबर, 2006 को 03:32 GMT तक के समाचार
एक बड़े वैज्ञानिक अध्ययन में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया है कि यदि वर्तमान रुझान जारी रहे तो 50 साल के भीतर समुद्र में मछलियाँ लगभग ख़त्म हो सकती हैं.
ये शोध साइँस पत्रिका में छपा है और इससे पता चला है कि वाणिज्य दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाली मछलियों की तीस प्रतिशत प्रजातियों की संख्या में भारी कमी आई है.
अध्ययन के मुताबिक मछली की ऐसी अन्य प्रजातियों की स्थिति भी ऐसी ही हो जाएगी.
शोधकर्ताओं के नेता कनाडा के डलहाऊज़ी विश्वविद्यालय के बोरिस वर्म का कहना है, "हम जब समुद्री संपदा का इस्तेमाल करते हैं तो हम मान कर चलते हैं कि कुछ प्रजातियाँ नष्ट भी हो जाएँ तो अन्य प्रजातियाँ तो रहेंगी ही."
लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "हम इस ओर ध्यान दिलाना चाहते हैं कि समुद्री मछलियों की संख्या सीमित है और हम एक-तिहाई को ख़त्म कर चुके हैं और इसी तरह चले तो बाक़ी को भी ख़त्म कर देंगे."
ये बहुत ही विस्तृत अध्ययन है और इसमें यूरोप और अमरीकी महाद्वीपों के कई संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हैं.
महत्वपूर्ण है कि बेहतर नौकाओं, नेट और तकनीक के इस्तेमाल के बावजूद ज़्यादा मछली नहीं पकड़ी जा रही और वर्ष 1994 और 2003 के बीच दुनिया भर में 13 प्रतिशत कम मछली पकड़ी गई.
'समाधान संभव'
वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्री मछली के लुप्त होने से तटीय जैवविविधता और पानी की गुणवत्ता के लिए ख़तरा पैदा हो जाएगा.
ब्रिटेन के पर्यावरण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी बेन ब्रैडशॉ ने समुद्री मछली के लिए पैदा हुए ख़तरे को पृथ्वी के लिए दूसरी सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरण चुनौती बताया है.
उनका कहना है कि कमज़ोर प्रशासन का इस समस्या में बड़ा योगदान है.
लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी इतनी देर नहीं हुई है कि समुद्री मछली के ख़त्म हो जाने के ख़तरे का समाधान न किया जा सके.
इस संदर्भ में उन्होंने कहा है कि ऐसे क्षेत्र बनाए जाएँ जो समुद्री रिज़र्व इलाक़े हो और जहाँ मछली पकड़ने पर प्रतिबंध हो.