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मंगलवार, 31 अक्तूबर, 2006 को 16:56 GMT तक के समाचार

क़र्ज़ से मुक्ति चाहिए थी अलेक्ज़ांडरा को

क़र्ज़ बहुत बुरी चीज़ है. जो लोग क़र्ज़ में डूबे हुए हैं उनसे पूछिए कि यह उनके लिए कितना बड़ा अभिशाप है.

आपने अब तक लोगों को गहने, बर्तन और अन्य क़ीमती सामान बेच कर ऋण चुकाते देखा होगा लेकिन ब्रिटेन की अलेक्ज़ांडरा सॉंडर्स को इसके लिए अपने शरीर का एक अंग सबसे उपयुक्त लगा.

ब्रिटेन में हर छह दम्पत्ति में से एक संतान के लिए प्रयास कर रहा है. अलेक्ज़ांडरा को लगा कि क्योंन वह अपना अंडाणु यानी डिंब बेच कर अपने क्रेडिट कार्ड पर चढ़े पैसे उतार दें.

वह कहती हैं, "मैं 25 वर्ष की हूँ और तीन जगह नौकरी करती हूँ. दिन में एक दफ़्तर में और शाम को दो अलग-अलग पब में. मैं सप्ताह में पाँच रात काम करती हूँ लेकिन क़र्ज़े के बोझ से दबी हुई हूँ".

अलेक्ज़ांडरा का कहना है कि एक डॉक्टर के क्लीनिक में अपनी बारी का इंतज़ार करते हुए उन्होंने एक पत्रिका के पन्ने पलटे तो उसमें एक लेख था जिसमें लिखा था कि किसी ने अपने अंडाणु बेच दिए.

"उसमें लिखा था कि ब्रिटेन की लड़कियाँ अमरीका जा कर अपने अंडाणु हज़ारों डॉलर में बेच रही हैं. बस मैंने भी फ़ैसला कर लिया".

"मैं इनका इस्तेमाल तो कर नहीं रही हूँ, कोई और कर ले तो क्या हर्ज है".

इस तरह की घटनाएँ अब आम होती जा रही हैं. एक युवती तो पाँच बार अपने अंडाणु बेच चुकी है. इस तरह की कार्रवाइयों की एक वजह भी नज़र आती है.

पहले अंडाणु दान देने वाली महिला का नाम गुप्त रखा जाता था लेकिन अब एक क़ानून के तहत बच्चे के 18 वर्ष का होने पर उसे यह जानने का अधिकार होगा कि उसकी जैविक माँ कौन है.

यही वजह है कि अब बहुत सारी महिलाएँ सामने नहीं आ रही हैं और अंडाणु के लिए इंतज़ार करने वाली महिलाओं की तादाद बढ़ रही है.

अलेक्ज़ांडरा ने अपने अंडाणु बेचने के लिए इंटरनेट पर विज्ञापन दे दिया है और वह जवाब का इंतज़ार कर रही हैं.