गुरुवार, 05 अक्तूबर, 2006 को 15:57 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन के वैज्ञानिकों का कहना कि उन्होंने एक ऐसा अध्ययन किया है जिसमें पता चलता है कि दर्द निवारक दवा एस्प्रिन कैंसर का मुक़ाबला करने में मदद कर सकती है.
वैज्ञानिकों ने प्रयोगशालाओं में किए गए परीक्षणों में पाया है कि दर्द निवारक दवा एस्पिन उन रक्त कोशिकाओं को बनने रोकने में मदद कर सकती है जो कैंसर का फोड़ा बनने में मदद करती हैं.
ब्रिटेन के न्यूकासल विश्वविद्यालय के एक वैज्ञानिक दल ने अपने इस शोध में पाया है कि एस्प्रिन के इस्तेमाल से कैंसर के फोड़े को मटर के दाने के बराबर आकार तक समेटा जा सकता है.
जानकारों का कहना है कि इस नए शोध से कैंसर के इलाज में नई दिशा मिल सकती है.
इस ताज़ा अध्ययन के नतीजे जर्नल ऑफ़ द फैडरेशन ऑफ़ अमेरिकन सोसायटीज़ फ़ॉर एक्सपेरीमेंटल बॉयोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं.
एस्प्रिन को दर्द निवारण के लिए चमत्कारी दवा माना जाता है और दिल के दौरे का ख़तरा कम करने के लिए भी एस्प्रिन खाने की सिफ़ारिश की जाती है.
इससे पहले के अध्ययनों में बताया गया था कि अगर एस्प्रिन का सेवन लंबे समय तक किया जाए तो कई क़िस्मों के कैंसर का ख़तरा कम किया जा सकता है.
कैंसर की रोकथाम की संभावना की गहराई से जाँच के लिए वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की कि यह दवाई कैंसर के फोड़े पर किस तरह काम करती है.
इस प्रयोग में वैज्ञानिकों ने एस्प्रिन की विभिन्न तत्व उन रक्त सेल्स में मिलाकर देखे जो रक्त कोशिकाओं में से होकर जाते हैं.
वैज्ञानिकों ने पाया कि अगर एस्प्रिन को कम मात्रा में खाया जाए तो यह रक्त कोशिकाएँ बनाने की सेल्स की क्षमता को असरदार तरीके से प्रभावित करता है.
न्यूकासल विश्वविद्यालय के इस दल की मुखिया डॉक्टर हेलेन आर्थर का कहना था, "कैंसर को ऑक्सीज़न और अन्य पोषक तत्व रक्त कोशिकाओं में से ही मिलते हैं जिससे वो बढ़ता है. कैंसर ख़ुद को शरीर में फैलाने के लिए नई रक्त कोशिकाओं का भी इस्तेमाल करता है."
मटर के बराबर
वैज्ञानिकों का कहना है कि एस्प्रिन कैंसर का फोड़े बनने से रोकने में कई तरह से मदद करती है. उनमें से एक तरीका ये है कि वह रक्त आपूर्ति को कम कर देती है.
"रक्त के ज़रिए ऑक्सीज़न और पोषक तत्वों की आपूर्ति नहीं होने से कैंसर का फोड़ा मटर के दाने से बड़ा आकार नहीं ले पाता है और इस तरह कैंसर वहीं रुक जाता है."
डॉक्टर हेलेन आर्थर का कहना है कि इससे पता चलता है कि एस्प्रिन कैंसर को रोकने में किस तरह से मदद करती है और इससे इलाज में नई दिशा भी मिल सकती है.
हालाँकि उनका यह भी कहना है, "अगर ज़्यादा लंबे समय तक एस्प्रिन खाई जाए तो पेट में रक्तस्राव का ख़तरा भी हो सकता है. हम उन चीज़ों को भी देखना चाहते हैं जो नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण को प्रभावित करती हैं और इनसे अंततः सुरक्षित दवाएँ बनाने की दिशा मिल सकती है."
दूसरी तरफ़ कैंसर रिसर्च यूके संगठन की वरिष्ठ वैज्ञानिक सूचना अधिकारी डॉक्टर कैट अरनी का कहना था कि इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने सिर्फ़ उन सेल्स पर प्रयोग किया जो प्रयोगशाला में विकसित किए गए थे.
डॉक्टर कैट अरनी ने कहा, "अभी यह सुनिश्चित करने में काफ़ी लंबा समय और प्रयास लगेंगे कि क्या एस्प्रिन और इस तरह की अन्य दवाइयों को कैंसर के इलाज में प्रयोग किया जा सकता है और एक लंबे रास्ते में यह सिर्फ़ एक एक क़दम है."
उन्होंने कहा, "हम कैंसर के मरीज़ों को यह सिफ़ारिश नहीं कर सकते कि वे चिकित्सीय सलाह के बिना एस्प्रिन खाएँ क्योंकि इसकी बड़ी ख़ुराक ख़तरनाक हो सकती है."