मंगलवार, 03 अक्तूबर, 2006 को 08:50 GMT तक के समाचार
एक शोध से पता चला है कि इटली में सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध लगने के बाद से दिल का दौरा पड़ने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है.
इटली के पाइडमॉंट इलाक़े में ये अध्ययन किया गया है. विशलेषण के मुताबिक प्रतिबंध लगने के बाद पहले पाँच महीनों में, दिल का दौरा पड़ने के चलते अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या में पिछले साल के मुकाबले 11 प्रतिशत की कमी आई है.
अध्ययन करने वाली टीम ने यूरोप की पत्रिका हार्ट जर्नल में लिखा है कि ऐसा 'पैसिव स्मोकिंग' में कमी आने से हुआ है.
पैसिव स्मोकिंग से प्रभावित होने वाले वे लोग होते हैं जो धूम्रपान नहीं करते पर आस-पास हो रहे धूम्रपान के चलते धुँए का शिकार हो जाते हैं.
इटली की सरकार ने 2005 में ऐसी सभी सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान पर रोक लगा दी है जो अंदर हैं जैसे कैफ़े, बार और रेस्तरां.
आयरलैंड, नॉर्वे, दक्षिण अफ़्रीका और स्वीडन में भी ऐसा ही प्रतिबंध लागू है.
'ख़तरा कम'
साँस की बीमारी और फ़ेफ़डे के कैंसर समेत कई ऐसी बीमारियाँ हैं जिनका संबंध धूम्रपान से है.
इटली में टयूरिन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पाइटमॉंट इलाक़े में दिल का दौरा पड़ने के बाद भर्ती होने वाली मरीज़ों की संख्या का अध्ययन किया है.
साथ ही उन लोगों का भी जिनकी भर्ती होने के बाद मौत हो गई.
ये अध्ययन धूम्रपान पर प्रतिबंध लगने के बाद के समय-फऱवरी 2005 से जून 2005 में किया गया. शोध 60 वर्ष से कम उम्र वाले लोगों पर हुआ.
शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रतिबंध लगने का बाद दिल के दौरे के 832 मामले सामने आए जबकि पिछले वर्ष इस दौरान 922 मामले हुए थे. यानी 11 फ़ीसदी की गिरावट.
उधर ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन के रुआरी ओ कॉनर ने कहा कि इस अध्ययन पर हम सतर्कता से प्रतिक्रिया दे रहे हैं लेकिन ये ज़रूर लग रहा है कि धूम्रपान से जुड़ी ऐसी नीतियाँ का दिल के दौरे के मामलों पर असर हो सकता है.
लेकिन हॉर्ट जनरल पत्रिका में छपे एक अन्य लेख में धूम्रपान पर लगी रोक को लेकर आलोचना भी की गई है.