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शनिवार, 23 सितंबर, 2006 को 02:17 GMT तक के समाचार

सूर्य के अध्ययन के लिए अंतरिक्ष यान

जापानी अंतरिक्ष एजेंसी ने सूर्य के अध्ययन के लिए एक यान रवाना किया है. सोलर-बी नामक यह यान धरती की कक्षा में रहते हुए काम करेगा.

जापानी अंतरिक्ष एजेंसी जाक्शा और मित्सुबिशि इलेक्ट्रिक कंपनी निर्मित सोलर-बी यान के बारे में वैज्ञानिकों का दावा है कि ये सूर्य के सतह की अब तक की सर्वाधिक स्पष्ट तस्वीरें मुहैया कराएगा.

सोलर-बी को कई जटिल काम सौंपे गए हैं, जिनमें सूर्य के वातावरण के बारे में जानकारी जुटाना और सौर-ज्वालाओं की उत्पत्ति के कारणों की टोह लेना महत्वपूर्ण हैं.

भीषण विस्फोट के बाद सूर्य की सतह पर पैदा होने वाली सौर-ज्वालाओं के साथ लाखों परमाणु बमों की ताक़त के बराबर ऊर्जा मुक्त होती है.

सौर-ज्वालाओं का असर सौर-मंडल में दूर-दूर तक होता है, और इसके कारण धरती पर संचार प्रणाली के तहस-नहस होने की आशंका हमेशा बनी रहती है.

उम्मीद

अब यदि सोलर-बी मिशन क़ामयाब रहा, तो वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि, शक्तिशाली सौर-ज्वालाओं की उत्पत्ति के बारे में पहले से ही सटीक अनुमान लगाए जा सकेंगे. ऐसा संभव हुआ तो धरती पर संचार प्रणाली को सुरक्षित रखा जा सकेगा.

सौर-ज्वालाओं में वैज्ञानिकों की दिलचस्पी एक और कारण से भी है. दरअअल इन शक्तिशाली ज्वालाओं के साथ अंतरिक्ष में नुक़सानदेह विकिरण भी फैलते हैं.

ये हानिकारण विकिरण धरती के वायुमंडल को तो पार नहीं कर पाते, लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों को इनसे नुक़सान पहुँचने की आशंका बनी रहती है.

अब, सोलर-बी यान सूर्य के चुंबकीय क्षेत्रों के अध्ययन के ज़रिए, सौर-ज्वालाओं की पहेली को सुलझाने की कोशिश करेगा.

माना जाता है कि अनियमित तौर पर उठने वाली इन ब्रह्मांडीय ज्वालाओं की उत्पत्ति में सूर्य की चुंबकीय ताक़त का मुख्य योगदान होता है.