गुरुवार, 14 सितंबर, 2006 को 10:58 GMT तक के समाचार
लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका मोबाइल फोन अब उनके तनाव और चिड़चि़ड़ेपन का कारण बन रहा है.
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लोग मोबाइल फोन के आदी हो रहे हैं और इससे वे तनावग्रस्त और चिड़चिड़े बन रहे हैं.
डॉक्टर डेविड शेफील्ड ने मोबाइल प्रयोग करने वाले 106 लोगों पर किए गए अध्ययन में 16 प्रतिशत लोगों के व्यवहार में समस्याएँ पाईं.
जिन लोगों ने मोबाइल फोन का प्रयोग छोड़ दिया था, उनका ब्लडप्रेशर काफी कम पाया गया.
लेकिन दूसरी ओर मोबाइल ऑपरेटरों ने इसे व्यक्ति की स्वतंत्रता को दर्शाने वाले यंत्र बताया और कहा कि इसे इसी रुप में देखा जाना चाहिए.
शोधकर्ताओं ने मोबाइल प्रयोग करने वाले छात्रों से पूछा कि उन्होंने किस तरह इसका इस्तेमाल किया.
इनमें करीब 16 प्रतिशत छात्र ऐसे थे जिन्होंने मोबाइल के प्रयोग को लेकर झूठ बोला और सही जानकारी नहीं दी.
कुछ लोगों ने इस बारे में झूठ बोला कि उन्होंने वास्तव में मोबाइल का कितना इस्तेमाल किया. वहीं कुछ ने यह छिपाने की कोशिश की कि मोबाइल के प्रयोग के बाद वे चिड़चिड़े हो गए.
अध्ययन में यह देखा गया कि जिन मोबाइल इस्तेमाल करने वालों ने धीरे-धीरे फोन का इस्तेमाल बंद कर दिया था, पहले के मुकाबले उनका ब्लडप्रेशर काफ़ी कम था.
कैंसर
डॉ शेफील्ड ने कहा, मोबाइल फोन का हमारे सामाजिक जीवन के हर पहलू पर प्रभाव है. उनका कहना है कि "अध्ययन के नतीजों से पता चलता है कि भारी संख्या में लोग मोबाइल का प्रयोग कर रहे है और इसका उनके जीवन पर गहरा प्रभाव है."
मोबाइल फ़ोन को लेकर पहले ही लंबे समय से यह बहस चली आ रही है कि इसका प्रयोग कैंसर के खतरे का बढ़ता है या नहीं. इस मुद्दे पर किए गए अध्ययनों से मिले-जुले नतीजे मिले हैं, जबकि स्टीवन कमीशन की सरकारी रिपोर्ट में यह निष्कर्ष दिया गया है कि इससे स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं हैं.
मोबाइल ऑपरेटरों के संगठन जीएसएम एसोशिएशन के डेविड प्रिंगल का कहना है कि इस विवाद के दो पहलू थे. उन्होंने मोबाइल फोन को एक लिबरेटिंग टूल बताया और कहा- "अगर आप बात नहीं करना चाहते तो आसानी से इसे बंद कर सकते हैं. आप उस समय लोगों से संपर्क में रहते हैं जब आप चाहते है."