विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक टीबी का एक ऐसा रूप सामने आया है जिसका इलाज करना लभगभ असंभव सा है.
इसे एक्सट्रीम ड्रग रिज़ीसटेंट टीबी कहा जा रहा है. टीबी का ये रूप अमरीका, पूर्वी यूरोप और अफ़्रीका में देखा गया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉक्टर पॉल नून का कहना है कि उपचार के सही तरीके को लागू न कर पाना इसके लिए ज़िम्मेदार है.
इस समस्या से निपटने के तौर तरीकों पर विचार करने के लिए विशेषज्ञ दक्षिण अफ़्रीका के जोहानिसबर्ग में इकट्ठा हुए हैं.
टीबी के चलते विश्व में हर साल करीब 17 लाख लोगों की मौत होती है. शोधकर्ता इस बीमारी के ऐसे विषाणुओं के सामने आने से चिंतित हैं जिन पर दवाओं का असर नहीं होता.
एक्सडीआर टीबी
बीमारी के लिए ग़लत तरह की दवाई, ग़लत सयम पर लेने से दवा बेअसर हो जाती है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक एमडीआर टीबी यानी मल्टी ड्रग रिज़ीसटेंट टीबी के करीब चार लाख पच्चीस हज़ार मामले हर साल सामने आते हैं.
इनमें से ज़्यादातर मामले भारत, चीन और पूर्व सोवियत संघ से होते हैं.
मल्टी ड्रग रिज़ीसटेंट टीबी बीमारी का वो रूप है जिसमें ऐसे विषाणु हों जिन पर कम से कम दो मुख्य तरह की टीबी की दवाओं का असर नहीं होता है.
इस तरह की टीबी के लिए अलग किस्म की दवाओं का इस्तेमाल करना पड़ता है.
ये दवाएँ ज़्यादा नुकसानदेह और मंहगी होती हैं और साथ ही ठीक होने में समय भी ज़्यादा लगता है.
लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि एक्सडीआर टीबी एमडीआर टीबी से भी ज़्यादा खतरनाक है.
एक्सडीआर टीबी यानी एक्सट्रीम ड्रग रिज़ीसटेंट टीबी में ऐसे विषाणु होते हैं जिन पर टीबी की मुख्य दवाओं का असर नहीं होता है. इसके अलावा दूसरी पंक्ति की दवाओं में से भी तीन या उससे ज़्यादा दवाएँ बेअसर होती हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉक्टर पॉल नून के मुताबिक एचआईवी पीड़ित लोगों को एक्सडीआर टीबी का ख़तरा ज़्यादा है.
उन्होंने कहा कि ये बेहद ज़रूरी है कि भविष्य में इससे निपटने के लिए नई दवाएँ बनाईं जाएँ.