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सोमवार, 28 अगस्त, 2006 को 10:47 GMT तक के समाचार

बुढ़ापे में बहरेपन के लिए जीन ज़िम्मेदार

नीदरलैंड के शोधकर्ताओं के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता कम होने या बहरेपन के लिए एक ख़ास जीन में खोट ज़िम्मेदार है.

ब्रिटेन में 61 से 70 वर्ष की आयु के 37 फ़ीसदी और 71 से 80 साल की आयु के 60 फ़ीसदी लोगों में बढ़ती उम्र के साथ यह समस्या पाई गई है.

बहरेपन का पता लगाने के लिए एंटवर्प विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 40 से 80 वर्ष की आयु के 1200 लोगों पर शोध किया.

अध्ययन से पता चला कि जिन लोगों के ‘केसीएनक्यू-4 जीन’ में तेजी से बदलाव हुए उनमें बढ़ती उम्र के साथ बहरेपन की समस्या आम थी. शोधकर्ताओं की टीम इस मामले में कुछ और अनुसंधान करना चाहती है.

इस अध्ययन को वित्तीय मदद मुहैया कराने वाले संस्थान ‘रॉयल इंस्टीट्यूट फॉर डेफ पीपुल’ का कहना है कि इससे इलाज़ में मदद मिलेगी.

वैज्ञानिक यह पहले से ही जानते हैं कि ‘केसीएनक्यू-4’ में उत्परिवर्तन आनुवांशिक बहरेपन के लिए ज़िम्मेदार होते हैं. ऐसा छोटी उम्र में ही हो जाता है और इसका शोरगुल या पर्यावरण संबंधी कारणों से कोई लेना-देना नहीं है.

शोधकर्ताओं को अध्ययन के दौरान पता चला कि जिन लोगों की सुनने की क्षमता कम हो गई थी उनके डीएनए में भी सामान्य रुप से सुनने वालों की तुलना में अंतर पाया गया.

शोधकर्ता डॉ. राल्फ़ होम कहते हैं, “कई लोग इलाज़ की संभावना के बजाए ये मान लेते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ सुनने में परेशानी होती ही है. ताज़ा शोध से उम्मीद जगी है कि भविष्य में लोगों को इस तरह की परेशानी नहीं होगी."