शुक्रवार, 18 अगस्त, 2006 को 14:05 GMT तक के समाचार
चावल की उस जीन की खोज करने का दावा किया गया है जो धान के पौधे को पानी की अधिकता से होने वाले खतरे से बचा सकेगा.
एशिया के देशों के लिए यह एक बड़ी खुशखबरी है, दुनिया में सबसे ज्यादा चावल उपजाने वाले इस क्षेत्र में बाढ की वजह से हर वर्ष लगभग 524 अरब टन चावल बर्बाद हो जाता है.
दक्षिण पूर्व एशिया के चावल उपजाने वाले कई इलाके हर वर्ष मानसून के समय बाढ़ का खतरा झेलते हैं.
विज्ञान पत्रिका नेचर में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार इस जीन की खोज से दुनिया में धान की खेती और सुरक्षित हो जाएगी क्योंकि अधिकतर धान की फसल पानी में डूबे रहने के कारण पहले ही हफ्ते में मर जाती है.
ऐसे में सब-1ए-1 नाम की यह जीन किसानों के लिए उम्मीद की किरण बन कर आई है.
बाढ़ का खतरा
हालाँकि पिछले चालीस वर्षों में चावल की उपज बढ़कर दोगुनी हो गई है लेकिन दुनिया में तीन अरब से ज्यादा लोगों के मुख्य आहार चावल की माँग बढ़ती ही जा रही है.
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान की रिसर्च टीम के सदस्य डॉक्टर डेविड मेकिल का कहना है कि वैज्ञानिक पिछले पचास वर्षों से वाटर प्रूफ फसल की किस्म ईजाद करने की कोशिश कर रहे थे.
चावल की कुछ पारंपरिक किस्मों में पानी से बचाव की विलक्षण क्षमता होती है लेकिन व्यावसायिक महत्व की धान की किस्मों में यही क्षमता प्रतिरोपित कर एक नई किस्म नहीं बन पा रही थी.
वैज्ञानिकों के अनुसार पौधे अगर ज्यादा दिनों तक पानी में रह जाएँ तो उन्हें समुचित मात्रा में कार्बन डाई आक्साइड नहीं मिल पाता है जिसकी वजह से वो मर जाते हैं. अब इस नई जीन के प्रयोग से तैयार किस्म अपने अंदर इसके लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेगी.
टीम की एक अन्य सदस्य डॉक्टर पामेला रेनाल्ड का कहना है, "हमारी रिसर्च टीम को उम्मीद है कि इस नई खोज से गरीब किसानों और उनके परिवार वालों को एक ज्यादा भरोसेमंद खाद्य सुरक्षा मिल पाएगी."
जापान के नेशनल इंस्टीच्यूट आफ एग्रोबायोलाजिकल साइंस की तकूजी ससाकी ने इस प्रयोग को सफल बताया जबकि इससे पहले के प्रयोग असफल रहे थे.
इन वैज्ञानिकों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा को मज़बूती देने वाले कई और महत्वपूर्ण खोजों पर अब भी काम जारी है.