भारत के सुप्रीम कोर्ट ने शीतल पेय बनाने वाली कंपनियाँ कोका कोला और पेप्सी से कहा है कि वे चार हफ़्ते के भीतर शीतल पेय में कीटनाशक होने के मामले में अपना पक्ष रखें.
महत्वपूर्ण है कि जानी-मानी ग़ैरसरकारी संस्था सेंटर फ़ार सांइंस एंड एनवार्यनमेंट (सीएसई) ने हाल में आरोप लगाया था कि शीतल पेयों में अब भी कीटनाशकों की भारी मात्रा मौजूद है और ये मात्रा पहले की तुलना में अधिक है.
सीएसई के ताज़ा आरोपों के बाद बुधवार को भारतीय शीतल पेय निर्माता एसोसिएशन ने दावा किया था कि शीतल पेय का 'सेवन करना सेहत के लिए पूरी तरह से ठीक है.'
सीएसई ने तीन साल पहले एक सर्वेक्षण कर शीतल पेयों में ज़हरीले कीटनाशक होने की बात कही थी लेकिन शीतल पेय बनाने वाली कंपनियों ने इसे ख़ारिज कर दिया था.
इस मामले पर बनी एक संसदीय समिति ने सीएसई के आरोपों को सही ठहराया था.
इस मामले पर एक ग़ैरसरकारी संस्था ने दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी और शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये आदेश दिया.
'मानक बने, अधिसूचना नहीं'
सीएसई की प्रमुख सुनीता नारायण ने बुधवार को दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया था कि शीतल पेय की बड़ी कंपनियां अभी भी स्वच्छता को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं.
उन्होंने कहा था कि इन पेयों में भारी मात्रा में कीटनाशक अभी भी मौजूद हैं.
सीएसई की मांग थी कि इसके लिए मानक बनाए जाएँ. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय पर भी इस मामले में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया था.
सीएसई की नई रिपोर्ट के अनुसार शीतल पेयों के 11 ब्रांडों के 57 नमूनों में से सभी में तीन से छह कीटनाशक मिले.
कुल मिलाकर जहाँ कोका कोला में औसतन कीटनाशकों की 30 प्रतिशत अधिक मात्रा पाई जाती है जबकि पेप्सी में 27 प्रतिशत अधिक मात्रा पाई जा रही है.
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड ने मानक बना दिए हैं लेकिन सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं की है और सीएसई का आरोप है कि मानकों के बनने और अधिसूचना जारी करने के बीच में बड़ी कंपनियों का दबाव आ गया है.