http://www.bbcchindi.com

रविवार, 30 जुलाई, 2006 को 05:47 GMT तक के समाचार

एस नियाज़ी
भोपाल

फ़िल्मी गीतों से मरीज़ों का इलाज

भोपाल के सरकारी हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीज़ आजकल एक नये अनुभव से गुज़र रहे है.

इस अस्पताल के अस्थि रोग शल्य चिकित्सा वार्ड में पहुँचे मरीज़ों का इलाज संगीत थैरेपी के ज़रिए किया जा रहा है.

इस अस्पताल में मरीज़ों को इलाज के दौरान लता, आशा भोंसले, मोहम्मद रफ़ी और दूसरे गायकों के गाए हुए गीत सुनने को मिल रहे है.

यह प्रयोग शुरु किया है अस्पताल अधीक्षक एससी तिवारी ने और वो मानते हैं कि शास्त्रीय संगीत पर इस तरह का प्रयोग पहले ही कुछ जगहों पर शुरू हो चुका है मगर फ़िल्मी गीतों के साथ ऐसा प्रयोग पहली बार किया जा रहा है.

एससी तिवारी बताते हैं कि विदेशों में भी काफी जगहों पर ऐसा इलाज किया जाता है.

अस्पताल ने अलग-अलग बीमारियों के लिए अलग-अलग गाने चुन रखे है. हर गाना अपना अलग असर मरीज़ के दिमाग पर छोड़ता है.

मरीज़ों को ये गाने सुबह और शाम के वक्त सुनने को मिलते है.

मरीज़ भी ख़ुश

संगीत से इलाज को मरीज़ भी अच्छा मान रहे है.

लंबे अरसे से इस अस्पताल में भर्ती राम स्वरुप का मानना है, "संगीत एक तरह से ऊर्जा का संचार करता है. मरीज़ इसके चलते अपना दर्द भूल जाता है और अच्छा अनुभव करता है."

उनका कहना है कि संगीत काफ़ी हद तक मरीज़ को उसके बुरे अनुभव भुलाने में मदद करता है.

वही एक अन्य मरीज़ नन्ही बाई, जो स्वंय संगीत में रुचि रखती हैं का कहना है कि संगीत मन को शांति देता है.

वो कहती हैं, "मरीज़ के लिए यह बहुत ज़रुरी होता है. अगर मरीज़ का मन अच्छा रहेगा तो उसे ठीक होने में वक्त नही लगता".

एक मरीज़ के साथ देखरेख के लिए मौजूद रहने वाले सुमेर कुमार का कहना है कि निश्चित तौर पर संगीत ने उनके मरीज़ को अच्छा करने में मदद पहुँचाई है. उन्हें ठीक होने में जो वक्त लगता उसे संगीत ने ही कम कर दिया.

अस्पताल में बिस्तर में पड़े मरीज़ों के लिए यह वरदान साबित हो रहा है.

गीतों का चयन

इस संगीत थैरेपी को शुरु करने से पहले कई संगीतकारों से बातचीत की गई. उनके साथ मिलकर उन गानों को चुना गया जिनके ज़रिए इलाज किया जाना था.

अस्पताल अधीक्षक एससी तिवारी कहते है, "हमने जानेमाने संगीतकारों से बातचीत करके गीतों का चुनाव किया. इसके बाद उसमें अलग-अलग रागों को मिलाकर मरीज़ों पर इस्तेमाल किया गया."

मरीज़ों को आख़िर इस संगीत थैरेपी से कितना फ़ायदा हुआ है इसको जानने के भी प्रयास किए जा रहे है.

तिवारी का कहना है कि अब तक के मरीज़ों के अनुभव बताते है कि थैरेपी उऩ्हें फ़ायदा पहुँचा रही है.

तो भागदौड़ भारी इस ज़िंदगी में अगर आप किसी भी तरह का दर्द महसूस करते है, तो पहुँच जाएँ भोपाल के हमीदिया अस्पताल में और तैयार हो जाएँ गुज़रे ज़माने के गाने "मोहे भूल गए साँवारिया" के ज़रिए इलाज कराने के लिए.