रविवार, 30 जुलाई, 2006 को 12:01 GMT तक के समाचार
वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया है कि अफ़्रीकी हाथी पहाड़ी इलाक़ों में जाने से बचते हैं क्योंकि ऐसा करने में उनको ज़्यादा ऊर्जा गँवानी पड़ती है.
वैज्ञानिकों ने करेंट बायोलॉजि पत्रिका में लिखा है कि इस अध्ययन से हाथियों के संरक्षण में मदद मिल सकती है.
यह अध्ययन में उत्तरी कीनिया के जंगलों में किया गया, जहाँ 32 हज़ार वर्ग किलोमीटर के इलाक़े में क़रीब 5400 अफ़्रीकी हाथी निवास करते हैं.
इन अफ़्रीकी हाथियों का वज़न चार टन होता है. रोज़ाना 42 किलोग्राम भोजन की ज़रूरत पूरी करने के लिए उन्हें 16 से 18 घंटे घूमना पड़ता है.
वैज्ञानिकों ने हाथियों की गतिविधि पर उपग्रह से नज़र रखने के लिए उनके शरीर में जीपीएस उपकरण लगा दिए. हर तीसरे घंटे उनकी भौगोलिक स्थिति का आँकड़ा लिया गया.
वैज्ञानिकों ने पाया कि हाथी जंगल के 75 प्रतिशत हिस्से में ही घूमते हैं. भारी-भरकम अफ़्रीकी हाथियों ने जंगल में विचरण के लिए ऐसे गलियारे ढूँढ रखे हैं जिसमें पहाड़ी इलाक़े नहीं आते हैं.
ऊर्जा की बचत
सेव द एलिफ़ैंट्स संगठन के प्रमुख इयन डगलस-हैमिल्टन ने कहा, "पाँच डिग्री की ढलान वाले इलाक़ों में हाथियों की आबादी किसी समतल इलाक़े की आबादी से आधी पाई गई."
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी चार क्विंटल वज़नी हाथी को एक मीटर ऊँची ढलान वाली पहाड़ी पर चढ़ने में 25 हज़ार कैलोरी अतिरिक्त ऊर्जा की ज़रूरत पड़ेगी.
समुद्र तल से 14 हज़ार फ़ीट ऊँचे माउंट कीनिया पर ही पूरी ज़िंदगी बिता देने ले आइसी माइक नामक हाथी के बारे में डगलस-हैमिल्टन ने कहा कि इस बारे में और अध्ययन किए जाने की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा, "वास्तव में ढलान से नीचे उतरने में भी फिसलने से बचने के प्रयास में अतिरिक्त ऊर्जा की ज़रूरत होती है. इसलिए कोई हाथी किसी पहाड़ी पर चढ़ने-उतरने से बचना चाहेगा."