ब्रितानी दवा कंपनी ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन का कहना है कि उसने बर्ड फ़्लू के ख़तरनाक एच5एन1 वायरस के लिए दवा 'विकसित' कर ली है.
कंपनी के मुताबिक वर्ष 2007 तक इसे बड़े पैमाने पर तैयार किया जा सकेगा.
बीबीसी संवादादाता को जानकारी मिली है कि प्रयोगशाला में हुए परीक्षणों में जब इस दवा का 3.8 माइक्रोग्राम हिस्सा इस्तेमाल किया गया, तो ये दवा प्रभावी साबित हुई.
परीक्षण बेल्जियम में हुए थे. ग्लैक्सो ने परीक्षण के नतीजे प्रकाशित नहीं किए हैं.
दवा कंपनियाँ चाहतीं हैं कि दवाई की कम से कम मात्रा की ज़रूरत पड़े ताकि कम मात्रा के इस्तेमाल से ही बेहतर नतीजे मिलें.
उत्परिवर्तन का खतरा
ग्लैक्सो की प्रतिद्वंद्वी कंपनी फ़्रांस की सनोफ़ी अवेंटिस भी बर्ड फ़्लू के लिए दवा बनाने पर काम कर रही है.
पत्रिका लॉंसेट ने मई में लिखा था कि सनोफ़ी की दवा कुछ मरीज़ों पर प्रभावी रही है और उन्हें दवा की 7.5 माइक्रोग्राम मात्रा दी गई थी.
दवा कंपनियाँ बर्ड फ़्लू के लिए प्रभावी इलाज ढूँढने की कोशिश में लगी हुई हैं क्योंकि चिंता जताई जा रही है कि अगर बर्ड फ़्लू के वायरस का म्यूटेशन यानि उत्परिवर्तन हो गया तो ये आसानी से एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में फैल सकता है.
वर्ष 2003 से लेकर अब तक मनुष्यों में बर्ड फ़्लू के 231 मामले सामने आ चुके हैं जिनमें से 133 की मौत हो चुकी है.
हालांकि अभी तक मनुष्य से मनुष्य में इस विषाणु के फैलने के मामले सामने नहीं आए हैं.
किसी को नहीं पता कि ये विषाणु कैसा है,इसलिए कंपनियाँ कोई दवा भी नहीं बना पा रहीं.
लेकिन ग्लैक्सो अपनी नई दवा को लेकर उत्साहित है. हालांकि बीबीसी के व्यापारिक मामलों के संपादक का कहना है कि कई सवाल ऐसे हैं जिनका जबाव नहीं मिला है.
ख़ासकर ये कि अगर एच5एन1 का उत्परिवर्तन बड़े पैमाने पर होता है, तो इस बात को लेकर संदेह है कि ये दवा कितनी कारगर साबित होगी.