एक नए शोध में कहा गया है कि ऐसे बच्चों में दमा होने का ख़तरा अधिक होता है जो इनडोर स्विमिंग पूलों में तैराकी किया करते हैं.
ये शोध बेल्जियम में हुआ है जिसके अनुसार इनडोर स्विमिंग पूलों में तैरनेवाले बच्चों में दमे के ख़तरे की दर हर एक लाख व्यक्तियों में दो से तीन प्रतिशत बढ़ जाती है.
शोधकर्ताओं का मानना है कि इसका एक कारण पानी में मिला हुआ क्लोरीन रसायन हो सकता है जिसे स्विमिंग पूल को साफ़ रखने के लिए प्रयोग किया जाता है.
ये शोध बेल्जियम की कैथोलिक युनिवर्सिटी ऑफ़ लूवान ने किया है.
आकलन
शोधकर्ताओं की राय है कि बच्चों के स्वास्थ्य पर क्लोरीन उत्पादों के दूरगामी परिणामों का विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए.
साथ ही स्विमिंग पूलों में हवा आने-जाने का समुचित प्रबंध होना चाहिए और क्लोरीन की मात्रा पर भी निगाह रखी जानी चाहिए.
इस शोध दल ने तीन साल पहले भी एक अध्ययन किया था जिसमें ये पाया गया था कि स्विमिंग पूलों में प्रयोग होनेवाले क्लोरीन पसीने या मूत्र के साथ मिलकर नुक़सानदेह वाष्प छोड़ सकते हैं जिससे फेफड़ों को नुक़सान हो सकता है.
अभी किए गए शोध में यूरोप के 21 देशों के 13 से 14 वर्ष के लगभग 1,90,000 बच्चों पर अध्ययन किया गया.
इन देशों के सामान्य लोगों में दमा होने की दर की तुलना इन अलग-अलग देशों में ऐसे बच्चों से की गई जो स्विमिंग पूलों में तैरा करते थे.
ये पाया गया कि धन-संपत्ति, वातावरण, ऊँचाई आदि तमाम दमा के कारणों को ध्यान में रखने के बावजूद ये पाया गया कि स्विमिंग पूलों में तैरनेवाले बच्चों में दमे का ख़तरा अधिक होता है.
इस बारे में ब्रिटेन की चैरिटी संस्था अस्थमा यूके के एक प्रवक्ता ने कहा कि वैसे दमा से पीड़ित बच्चों के लिए तैराकी एक अच्छा व्यायाम है.
साथ ही प्रवक्ता ने कहा कि वे ये भी मानते हैं कि पानी में क्लोरीन की मात्रा से कुछ ख़तरा हो सकता है लेकिन अभी इस संबंध में और शोध किए जाने की आवश्यकता है.