रविवार, 16 जुलाई, 2006 को 12:36 GMT तक के समाचार
भारतीय वैज्ञानिकों ने जानलेवा बीमारी बर्ड फ़्लू से निपटने के लिए कारगर टीका विकसित करने में सफलता हासिल कर ली है. कृषि मंत्री शरद पवार ने यह जानकारी दी.
शरद पवार ने बताया कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित एनिमल डिज़ीज़ लेबॉरेट्री ने बेहद कम समय में यह टीका विकसित करने में सफलता हासिल की है.
उन्होंने कहा, "यह बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि है. अगर व्यावहारिक तौर पर कहें तो हमारे विशेषज्ञों ने बहुत जल्दी सफलता प्राप्त कर ली. मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बधाई देता हूं."
इस टीके के व्यावसायिक इस्तेमाल की संभावना के बारे में पूछे जाने पर कृषि मंत्री ने कहा कि कुछ और परीक्षण हो जाने के बाद ये टीके पॉल्ट्री मालिकों को उपलब्ध कराए जाएँगे.
पवार ने कहा कि अब तक टीके पर हुए अध्ययन के नतीजे संतोषजनक रहे हैं. यह टीका ख़तरनाक बर्ड फ़्लू विषाणु एच5एन1 को फैलने से रोकने में मददगार साबित होगा.
इस्तेमाल
इस टीके का इस्तेमाल उन पक्षियों पर किया जा सकता है जिनके ज़रिए बर्ड फ़्लू का संक्रमण फैलता है. मनुष्यों में यह बीमारी मुख्य तौर पर संक्रमित पक्षियों का मांस खाने से ही फैलता है.
मनुष्यों में संक्रमण फैलने पर टैमीफ़्लू नामक दवा दी जाती है लेकिन पक्षियों को ही टीका लगा देने से ख़तरनाक विषाणु का प्रसार रोका जा सकता है.
आईसीएआर के महानिदेशक मंगला राय ने कहा कि इस जानलेवा बीमारी से निपटने में यह टीका क़ाफी मददगार साबित होगा.
उन्होंने कहा, "एविएन इंफ़्लूएंजा जैसी संक्रामक बीमारियाँ किसी सीमा को नहीं जानतीं. इसलिए स्वदेशी तकनीक से विकसित यह टीका बर्ड फ़्लू को रोकने में असरदार होगा."
इस वर्ष फरवरी में पहली बार महाराष्ट्र में बर्ड फ्लू की शिकायत मिलने के बाद हज़ारों मुर्गियों को मारना पड़ा था. हलाँकि कोई भी व्यक्ति इसके संक्रमण से हताहत नहीं हुआ.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ पहली बार वर्ष 2003 में पूर्वी एशियाई देशों में बर्ड फ़्लू ने अपने पाँव पसारे थे. अब तक इस बीमारी से 132 लोगों की मौत हो चुकी है.