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रविवार, 25 जून, 2006 को 07:49 GMT तक के समाचार

डोडो की हज़ारों साल पुरानी हड्डियां

वैज्ञानिकों का कहना है कि तीन सौ साल पहले लुप्त हो चुके डोडो पक्षी की कुछ हड्डियां मॉरीशस में मिली हैं.

डोडो एक ऐसा पक्षी था जो उड़ नहीं सकता था. यह पक्षी क़रीब तीन सौ साल पृथ्वी से लुप्त हो गया और अभी भी उसके लुप्त होने के कारणों का पता नहीं चल सका है.

म़ॉरीशस में वैज्ञानिकों की टीम के अनुसार पहली बार डोडो का कंकाल पूरी तरह से सुरक्षित अवस्था में मिला है और इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि यह पक्षी लुप्त कैसे हुआ था.

पहले भी म़ॉरीशस में डोडो की कुछ हड्डियां मिली हैं लेकिन इस बार की खोज काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

डोडो की पूरी हड्डियां कभी नहीं मिली हैं और जो अंतिम हड्डियां थीं वो 1755 में इंग्लैंड के एक म्यूज़ियम में लगी आग में जल गईं.

बड़ी खोज

लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूज़ियम के डॉ जूलियन ह्यूम कहते हैं कि यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

रायटर्स संवाद समिति के अनुसार उन्होंने कहा " अगर डोडो की बिना टूटी हुई हड्डी पूरी तरह सुरक्षित अवस्था में मिली है तो इससे अच्छी बात क्या होगी. "

इस बार जो हड्डियां मिली हैं उसमें एक ही पक्षी के पैर की चार हड्डियां और पीछे का पूरा हिस्सा है. इससे पहले डोडो के पंख, सर का हिस्सा, अंगूठा इत्यादि मिल चुका है.

डॉ ह्यूम के अनुसार मॉरीशस में इसी स्थान पर उन कछुओं की भी हड्डियां मिली हैं जो डोडो के साथ ही लुप्त हो गए थे. इसके अलावा कई पेड़ों के बीज भी मिले हैं जो अब पैदा नहीं होते.

डोडो की ये हड्डियां दो हज़ार साल से भी अधिक पुरानी बताई जाती हैं.

डोडो

डोडो एक ऐसा पक्षी है जो उड़ नहीं सकता था. मान्यताओं के अनुसार यह पक्षी 17 वीं सदी में लुप्त होने लगा और अब यह बिल्कुल नहीं पाया जाता.

दिखने में बतख जैसा यह पक्षी बहुत ही प्यारा हुआ करता था.

पुर्तगाल और डेनमार्क के शिकारियों ने जमकर इस पक्षी का शिकार किया था और कहा जाता है कि डोडो शिकारियों से बिल्कुल नहीं डरते थे और उनके पास आ जाया करते थे.

डोडो को उनका यह नाम पुर्तगाली भाषा के मूर्ख शब्द से मिला है. शायद शिकारियों के पास खुद चल कर आ जाने की उनकी आदत के कारण ही उन्हें पुर्तगालियों ने डोडो ( मूर्ख) नाम दिया था.

मॉरीशस में पुर्तगालियों के आने के 200 साल के भीतर ही डोडो लुप्त हो गए थे.