गुरुवार, 15 जून, 2006 को 17:22 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन के वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे ख़ून में अगर एक ख़ास क़िस्म के प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है तो यह टाइप-2 मधुमेह होने का संकेत हो सकती है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ख़ास क़िस्म का प्रोटीन आरबीपी-4 कहलाता है जिसकी मात्रा की जाँच करके लक्षण दिखने से पहले ही मधुमेह का पता लगाया जा सकता है.
आरबीपी-4 की मात्रा को कम करने के लिए दवाइयों से भी ख़तरा कम हो सकता है.
यह खोज ब्रिटेन के ‘बेथ इसराइल डेकोनेस मेडिकल सेंटर’ ने की है और यह ‘न्यू इंगलैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन’ में प्रकाशित हुई है.
इस सेंटर के प्रोफ़ेसर बारबरा कहन ने कहा, “लक्षणों से पहले ही बीमारी को पहचान लेने से, मरीज़ों को बीमारी रोकने का मौक़ा मिल जाता है.”
बढ़ते आरबीपी-4 प्रोटीन की मात्रा उन लोगों में पाई जाती है जिनमें ‘इंसुलिन रेसिस्टेंस’ यानी इंसुलिन की प्रतिरोधी क्षमता होती है.
इस अवस्था में शरीर के एंन्द्रिक पदार्थ, इंसुलिन हॉर्मोन से मिलने की क्षमता छोड़ देते हैं.
इंसुलिन हमारे खून में प्रस्तुत चीनी को शरीर की शक्ति में परिवर्तित करता है लेकिन इस इंसुलिन कि हानि से हमारे खून में ग्लूकोज़ जमा होता है.
इस अवस्था से केवल टाइप-2 मधुमेह नहीं होता बल्कि हृदय संबंधित बीमारियों का भी बहुत बड़ा ख़तरा होता है.
मुश्किल
इसका पता लगाना मुश्किल भी साबित हो सकता है.
साल 2005 में वैज्ञानिकों की इसी टीम ने यह खोज की थी कि चर्बी से इकट्ठा होने वाला आरबीपी-4, चूहों में भी इंसुलिन प्रतिरोधी क्षमता पैदा कर सकता है.
वैज्ञानिकों ने उन लोगों की जाँच की जिनके परिवार में किसी न किसी को मधुमेह की बीमारी है.
वैज्ञानिकों ने यह भी दिखाया कि लोगों ने कसरत से आरबीपी-4 की मात्रा को कम किया और जिन्होंने कसरत नहीं की उनके शरीर में आरबीपी-4 की मात्रा कम नहीं हुई.
प्रोफ़ेसर बारबरा कहन ने कहा, “यह खोज हमें बताती है कि आरबीपी-4 एक महत्वपूर्ण निशानी है जो चिकित्सा संबंधी कार्यों में मदद करती है और इंसान के शरीर में इंसुलिन प्रतिरोधी क्षमता के बारे में बताती है. जिस प्रकार हमने चूहों में प्रयोग करके दिखाया.”
“यह मोटे लोगों के खान-पान को और शारीरिक योग्यता को भी सुधारती है, दुबले पतले लोग, जिनके परिवार में यह बीमारी है, इस जाँच से उचित दवाई ले सकते हैं.”
प्रोफ़ेसर बारबरा का कहना है कि इस शोध से डॉक्टरों को भी इस बढ़ती बीमारी पर क़ाबू पाने में मदद मिलेगी.”
चैरिटी डायबिटीज के शोध संचालक डॉक्टर इएन फ्रेम का कहना है, “टाइप-2 मधुमेह के कारणों का पता लगाना मुश्किल है. यह खोज इस अवस्था को बेहतर रूप से समझने में मदद करेगी और इससे लड़ने के नए रास्ते निकालने में भी मदद करेगी.”