सोमवार, 05 जून, 2006 को 06:54 GMT तक के समाचार
विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पाँच जून को प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के मरुस्थलों के लिए ऐसा ख़तरा पैदा हो गया है जैसा पहले कभी नहीं था.
ये पृथ्वी में मौजूद मरुस्थलों के बारे में पहली विस्तृत रिपोर्ट है.
इस रिपोर्ट के अनुसार जल-वायु परिवर्तन, पानी की माँग और पर्यटन से दुनिया के मरुस्थलों पर अभूतपूर्व दबाव है.
इस रिपोर्ट को तैयार करने वालों का कहना है कि बहुत सारा पानी ऐसी फ़सलें उगाने के लिए किया जा रहा है जो अत्यधिक पानी का इस्तेमाल करती हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने एक बयान में कहा, "पूरी पृथ्वी पर ग़रीबी, अनुपयुक्त भूमि प्रबंधन और जल-वायु परिवर्तन के कारण सूखे वाले क्षेत्र मरूस्थलों में बदल रहे हैं और इससे ग़रीबी भी बढ़ रही है."
अनुमान लगाया जा रहा है कि दुनिया के 12 मरूस्थल क्षेत्रों में से अधिकतर में मौसम आने वाले दिनों में और सूखा होगा.
जल-वायु परिवर्तन के कारण हिमनदों के पिघलने से मरुस्थलों में रहने वालों के लिए मुश्किल पैदा हो गई है क्योंकि दक्षिण अमरीका जैसे क्षेत्रों में मरुस्थल हिमनदों पर पानी के लिए निर्भर हैं.
मरुस्थलों में पहाड़ी इलाकों में रहने वाले वन्य जीवों के लिए विशेष ख़तरा पैदा हो गया है और यदि पर्याप्त कदम नहीं उठाए जाते तो ये क्षेत्र 50 साल के भीतर तबाह हो सकते हैं.