गुरुवार, 25 मई, 2006 को 11:35 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन के अनुसार उन बच्चों को आगे चल कर धूम्रपान की लत लगने की ज़्यादा आशंका होती है जिन्होंने एक बार भी सिगरेट पी हो.
कैंसर रिसर्च यूके के इस अध्ययन में 2,000 स्कूली बच्चों को शामिल किया गया था.
इस अध्ययन की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक बार भी सिगरेट पी चुके बच्चे के धूम्रपान का लती होने की आशंका वैसे किसी बच्चे से दुगुनी होती है जिसने कि कभी सिगरेट नहीं पीया हो.
विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार भी सिगरेट पी लेने के बाद धूम्रपान की तलब अगले तीन वर्ष या उससे भी ज़्यादा समय बाद तक महसूस हो सकती है.
विशेषज्ञों ने इसे 'स्मोकिंग स्लीपर इफ़ेक्ट' का नाम दिया है.
इस प्रभाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार स्लीपर इफ़ेक्ट का एक कारण यह हो सकता है कि पहली बार सिगरेट पीने के बाद तंबाकू में मौज़ूद निकोटीन संभवत: मस्तिष्क के उस हिस्से को प्रभावित करता हो जो कि तनाव की स्थिति में व्यक्ति को धूम्रपान के लिए प्रेरित करते हैं.
एक बार भी सिगरेट पीने का बच्चों पर एक अन्य तरह का प्रभाव पड़ता है, वो यह कि धूम्रपान को लेकर बच्चों की झिझक और भय बहुत कम हो जाता है.
जागरुकता बढ़ाने की ज़रूरत
यदि ब्रिटेन की बात करें तो यहाँ 11 साल के हर सात में से एक बच्चे ने धूम्रपान किया है, जबकि 15 साल के बच्चों में से दो तिहाई धुआँ उड़ा चुके हैं.
इस अध्ययन के बाद कैंसर रिसर्च यूके का कहना है कि धूम्रपान विरोधी प्रचार अभियान में इस बात को प्रमुखता से जगह मिलनी चाहिए कि एक बार भी सिगरेट पीना आगे चलकर भारी साबित हो सकता है.
इस संगठन ने बच्चों को धूम्रपान के ख़िलाफ़ जागरूक करने के लिए प्राथमिक विद्यालयों में भी अभियान चलाए जाने की अनुशंसा की है.