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शनिवार, 22 अप्रैल, 2006 को 23:46 GMT तक के समाचार

चीन हो सकता है स्पैमर नंबर वन

चीन आने वाले दिनों में सबसे अधिक जंक मेल या स्पैम भेजने वाले देशों की श्रेणी में पहले नंबर पर पहुंच सकता है.

नए आकड़ों के अनुसार चीन इस मामले में अमरीका को पीछे छोड़ सकता है जहां से फ़िलहाल सबसे अधिक जंक मेल भेजे जाते हैं.

इंटरनेट सिक्योरिटी फर्म सोफोस के अनुसार इस समय अमरीकी कंप्यूटरों से 23.1 प्रतिशत जंक मेल आ रहे हैं जबकि चीन के कंप्यूटरों से 21.9 प्रतिशत जंक मेल भेजे जाते हैं.

इस सूची में ब्रिटेन का नंबर दसवां है जबकि अगर सबसे बड़े स्रोत की बात की जाए तो एशिया से 40 प्रतिशत जंक मेल भेजे जाते हैं.

सोफोस के वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार ग्राहम क्लूले बताते हैं कि 2004 में दुनिया भर में जितने स्पैम या जंक मेल भेजे गए उसका 50 प्रतिशत अमरीका से आया था.

क्लूले के अनुसार इसमें अब कमी आई है क्योंकि अमरीका में इस संबंध में क़ानून कड़े किए गए हैं.

वो कहते हैं " अमरीका में स्पैम या जंक मेल भेजने वाले कई लोगों को सज़ा मिली है लेकिन यहां ज़रुरी बात यह है कि ये स्पैमर दुनिया में कहीं भी हो सकते हैं. "

स्पैम भेजने वालों की श्रेणी में तीसरे नंबर पर दक्षिण कोरिया और चौथे नंबर पर फ्रांस है जबकि भारत को शीर्ष दस देशों की सूची मे स्थान नहीं मिला है.

आंकड़ों के अनुसार प्रति दिन 13 अरब स्पैम मेले भेजे जाते हैं जिसमें से 70 प्रतिशत स्पैम तो दूसरों के कंप्यूटरों को हाईजैक करके भेजे गए. यानी जिसके कंप्यूटर से भेजे गए उसे पता तक नहीं कि उसके कंप्यूटर से वायरस वाले मेल भेजे जा रहे हैं.

सोफोस के अधिकारी कहते हैं कि स्पैम भेजने की प्रवृति अमरीका में भले ही कम हो रही हो लेकिन अन्य देशों में इसके बढ़ते प्रचलन के ख़तरे बहुत हैं.

उनका कहना है कि जर्मनी, फ्रांस और पोलैंड में पिछले छह महीनों में स्पैम मेल भेजने वालों की संख्या बढ़ी है.