शुक्रवार, 07 अप्रैल, 2006 को 04:59 GMT तक के समाचार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने कहा है कि विकासशील देशों में चिकित्सा कर्मचारियों की भारी कमी है और इस बार बड़ी बीमारियों से निपटने की कोशिशों पर गंभीर असर पड़ता है.
विश्व स्वास्थ्य दिवस (सात अप्रैल) के मौक़े पर जारी एक रिपोर्ट में डब्लूएचओ ने कहा है कि एशिया और अफ़्रीका के देशों में 20 लाख से ज़्यादा डॉक्टरों और नर्सों की तुरंत आवश्यकता है. ताकि टीबी, मलेरिया और एड्स जैसी बीमारियों से प्रभावी तरीक़े से निपटा जा सके.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़्रीका के एड्स प्रभावित देशों में सबसे ज़्यादा डॉक्टरों और नर्सों की कमी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में असमानता का भी विस्तार से ज़िक्र किया है.
प्रभावित देश
इस मामले में भी अफ़्रीकी देश सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं. अफ़्रीकी देशों में दुनिया की 24 प्रतिशत बीमारियाँ पाई जाती हैं जबकि यहाँ दुनिया के सिर्फ़ तीन प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मचारी हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक़ उत्तरी अमरीका में प्रत्येक हज़ार लोगों पर 80 डॉक्टर, नर्स या मिडवाइव्स हैं. लेकिन ज़्यादातर अफ़्रीकी देशों में सिर्फ़ दो ही ऐसे स्वास्थ्य कर्मचारी हैं.
अफ़्रीकी देश मलावी में सात में से एक व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित है. वहाँ 20 वर्षों से भी ज़्यादा समय से काम कर रहीं जॉर्जिना चिमुला ने बीबीसी को बताया कि कई अस्पतालों में तो सिर्फ़ एक नर्स को तीन हज़ार से ज़्यादा रोगियों की देखभाल करनी पड़ती है.
मलावी में नर्सों ने टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य सहायकों को प्रशिक्षित किया है इसके बावजूद कई ग्रामीण क्लिनकों में कर्मचारियों की संख्या काफ़ी कम है.
दक्षिण अफ़्रीका में भी इसकी झलक मिलती है. हाल ही में वहाँ के स्वास्थ्य मंत्रालय ने ज़्यादा से ज़्यादा नर्सों को प्रशिक्षित करने और वेतन में सुधार का कार्यक्रम शुरू किया है लेकिन अभी तक इसका ज़्यादा असर नहीं दिखता.