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रविवार, 12 मार्च, 2006 को 19:00 GMT तक के समाचार

'तीसरे मोर्चे पर एक राय नहीं'

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एबी बर्धन ने कहा है कि फ़िलहाल केंद्र की यूपीए सरकार का कोई विकल्प नहीं है.

उन्होंने कहा कि तीसरा मोर्चा बनाने के लिए एक वैकल्पिक कार्यक्रम पर आम सहमति बनानी होगी जो कि अभी तक नहीं बन सकी है.

उन्होंने कहा कि तीसरे मोर्चे पर तमाम राजनीतिक दलों की राय स्पष्ट नहीं है और अगर ऐसा विकल्प आ भी जाता है तो एक तीसरा मोर्चा बन जाएगा, इसकी संभावना कम ही है.

बर्धन ने यह बात बीबीसी हिंदी रेडियो के साप्ताहिक कार्यक्रम, आपकी बात, बीबीसी के साथ में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए कही.

केंद्र की यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों के सरकार के साथ तालमेल की सीमारेखा के बारे में उन्होंने कहा," कई मुद्दों पर मतभेद हैं पर सरकार से समर्थन वापस लेने के लिए यह सही वक्त नहीं है."

उन्होंने कहा, "हमारे बीच तनाव काफ़ी है पर वह मौका नहीं आया कि हम सरकार को अस्थिर कर दें."

निवेश और नीति

पिछले दिनों अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की भारत यात्रा पर बोलते हुए उन्होंने कहा, "बुश की यात्रा का देशभर में विरोध हुआ और इसका असर भी पड़ा. कई रिएक्टरों को जाँच के लिए नहीं दिया गया है पर सरकार और अमरीका के बीच समझौता चल रहा है. केंद्र सरकार अपनी स्वतंत्र विदेश नीति से भटक गई है."

बर्धन ने कहा कि वामदल विदेशी निवेश के पूरी तरह से विरोधी नहीं हैं पर इसके लिए ज़रूरी है कि निवेश उन क्षेत्रों में न हो, जो देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं.

बर्धन ने कहा, "अगर नए क्षेत्रों में निवेश होता है और इससे रोज़गार के अवसर बढ़ते हैं तो हम ऐसे विदेशी निवेश का विरोध नहीं करते हैं."

बर्धन मानते हैं कि सरकार की नीतियों में कई जगहों पर ख़ामियां है. हालांकि उन्होंने रोज़गार गारंटी कानून और सूचना का अधिकार कानून को वर्तमान सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि महिलाओं और आदिवासियों के लिए कानून बनाने की दिशा में अभी काम करना बाक़ी है.