सोमवार, 30 जनवरी, 2006 को 19:03 GMT तक के समाचार
भारत सरकार ने दावा किया है कि देश से कुष्ठ रोग का समाप्त हो गया है.
भारत पिछले पाँच दशकों से इस बीमारी से जूझ रहा था और इस बीमारी से छुआछूत जैसी सामाजिक समस्या भी जुड़ी हुई थी.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदॉस ने घोषणा की कि पिछले साल 31 दिसंबर तक कुष्ठ के केवल 1.07 लाख मामले सामने आए थे.
उनका कहना था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक फ़ीसदी से कम मामलों को कुष्ठ की समाप्ति माना जाता है. स्वास्थ्य मंत्री का दावा था कि अगला लक्ष्य इसका पूर्ण उन्मूलन है.
कुष्ठ उम्मूलन कार्यक्रम के महानिदेशक डॉक्टर जीरपीएस ढिल्लों ने बताया कि लगभग 26 राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों ने उन्मूलन का स्तर हासिल कर लिया है.
लेकिन अब भी आठ राज्यों में इसका स्तर ऊंचा है. इसमें दिल्ली, चंडीगढ, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड और छत्तीसगढ़ शामिल है.
स्वास्थ्य मंत्री का कहना था कि पड़ोसी राज्यों से रोगियों के आने के कारण दिल्ली में इनकी यहाँ संख्या अधिक है.
कुष्ठ रोग एक विषाणु से होता है. इससे अंगों की संवेदनशीलता खत्म हो जाती है और इस कारण चोट लगने या आग से जलने पर भी दर्द का एहसास नहीं होता.
आख़िरकार चोटिल अंगों की बीमारी इतनी बढ़ जाती है कि धीरे धीरे वे गलने लगते हैं.