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गुरुवार, 12 जनवरी, 2006 को 13:00 GMT तक के समाचार

चमकीला हरा सूअर बन पाएगा

ताइवान के वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने हरे रंग का चमकने वाला सूअर बनाने में सफलता प्राप्त की है जिसका इस्तेमाल मनुष्यों की बीमारियों से जुड़े शोध के लिए किया जा सकेगा.

वैज्ञानिकों ने जेलीफिश के डीएनए सूअरों के भ्रूण में मिलाकर ऐसा हरा चमकने वाला सूअर बनाने में सफलता हासिल की है.

ताइवान का दावा यह नहीं है कि उन्होंने पहली बार ऐसा सूअर बनाया है जो अंधेरे में चमकता है लेकिन उनका कहना है कि उन्होंने जिस तरह का चमकीला सूअर बनाने में सफलता हासिल की है वो सबसे बेहतर है.

ये सूअर अंदर से हरे रंग के हैं जो अंधेरे में चमक सकते हैं. यहां तक कि इन सूअरों के दिल और शरीर के अंदरुनी अंग भी हरे रंग के हैं.

यह रंग लाने के लिए सूअर के भ्रूण में जेलीफिश के डीएनए मिलाए गए. जेलीफिश एक प्रकार की समुद्री मछली है और चमकीली होती है.

सूअर के 265 भ्रूणों में जेलीफिश का डीएनए मिलाकर उसे पाँच सूअरों में रखा गया जिसमें से चार सूअरों को गर्भ ठहरा और जो बच्चे हुए उसमें सूअरों के साथ साथ जेलीफिश के गुण यानी चमकने के गुण आ गए.

शोधकर्ताओं का कहना है कि दिन के उजाले में इन सूअरों के दाँत और थूथन भी हरे दिखते हैं और शरीर भी हल्का हरा. अगर इन पर नीले रंग की रोशनी डाली जाए तो सफेद प्रकाश देखा जा सकता है.

अब वैज्ञानिक इन सूअरों के ज़रिए मानवीय बीमारियों का अध्ययन करने में लगे हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि अब किसी भी डीएनए का रंग बदल कर देखा जा सकता है कि वह भ्रूण के भीतर कैसे काम करता है क्योंकि रंग के कारण वो आसानी से पहचाना जा सकता है.

लेकिन ये काम इतना आसान नहीं है और कई भ्रूण ख़राब भी हो गए.

वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि अब ये हरे सूअर सामान्य सूअरों के साथ नई पीढ़ी के सूअर पैदा कर सकेंगे जिनका उपयोग शोधकार्यों में किया जा सकेगा.