शुक्रवार, 23 दिसंबर, 2005 को 05:55 GMT तक के समाचार
दक्षिण कोरिया में जाँचकर्ताओं ने कहा है कि साल 2005 के शुरू में तहलका मचा देने वाली मानव भ्रूण-स्टेम कोशिका की क्लोनिंग यानी ये कोशिकाएँ तैयार करने के शोध को फर्जी पाया है.
मानव भ्रूण की क्लोनिंग के विशेषज्ञ ह्वांग वू सुक की उनके इस शोध के लिए काफ़ी आलोचना की गई थी लेकिन उन्होंने कहा कि वह निर्दोष हैं.
हालाँकि सियोल के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय पैनल ने कहा है, "यह जानबूझकर जालसाज़ी" का मामला है और डॉक्टर ह्वांग के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
पैनल ने कहा है कि डॉक्टर ह्वांग वू सुक की कुत्तों और मानव पर किए गए अन्य शोध कार्यों की भी जाँच की जाएगी.
इस विवाद से दक्षिण कोरिया में ख़ासा विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि डॉक्टर ह्वांग वू सुक को मानव भ्रूण की क्लोनिंग के मामले में एक राष्ट्रीय हीरो का सम्मान मिला था.
2002 से सिर्फ़ विज्ञान और प्रोद्योगिक मंत्रालय से डॉक्टर ह्वांग वू सुक को चार करोड़ डॉलर की राशि मिल चुकी है.
मई 2005 में डॉक्टर ह्वांग वू सुक ने साइंस पत्रिका में एक लेख प्रकाशित किया था जिसमें उन्होंने लिखा था कि उनके शोध दल ने 11 मरीज़ों के डीएनए की हूबहू नक़ल मानव भ्रूण की क्लोनिंग करके बनाई गई सामग्री से तैयार की है.
यह दावा किया गया था इस तकनीक से बहुत सी बीमारियों का इलाज करने में मदद मिल सकेगी जिनमें डायबटीज़ और परकिन्संस जैसी बीमारियाँ भी शामिल हैं.
लेकिन विश्वविद्यालय के पैनल ने कहा है कि 11 प्रकार का डाटा सिर्फ़ दो स्टेम कोशिका लाइनों से लिया गया था.
विशेषज्ञों ने कहा कि डॉक्टर ह्वांग वू सुक ने क्लोन की हुई कोशिकाएँ मरीज़ की मूल कोशिकाओं से मेल बिठाने के बजाय एक ही मरीज़ की कोशिकाएँ विश्लेषण के लिए दो टेस्ट ट्यूब में विभाजित कर दी थीं.
उन्होंने कहा, "इन नतीजों के आधार पर कहा जा सकता है कि 2005 में साइंस पत्रिका में पेश किए गए तथ्यों को सिर्फ़ एक साधारण दुर्घटना ही नहीं कहा जा सकता बल्कि दो प्रकार की स्टेम कोशिकाओं को जानबूझकर ग़लत तरीके से पेश करने का मामला है."
डॉक्टर ह्वांग वू सुक तब दबाव में आ गए थे जब साइंस पत्रिका में छपने वाली रिपोर्ट के एक सहलेखर रोह सुंग इल ने कहा कि क्लोनिंग को दिखाने वाली तस्वीर नक़ली है.
डॉक्टर ह्वांग वू सुक ने पिछले सप्ताह स्वीकार किया था कि तस्वीरों में कुछ त्रुटियाँ थीं लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा था कि शोध सही था और उन्होंने 11 स्टेम कोशिकाओं की क्लोनिंग की थी.