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बुधवार, 14 दिसंबर, 2005 को 17:01 GMT तक के समाचार

इंसुलिन की ज़्यादा मात्रा ख़तरनाक?

शोधकर्ताओं का कहना है कि डायबटीज़ पर नियंत्रण रखने वाली इंसुलिन की सामान्य से ज़्यादा मात्रा किसी व्यक्ति के लिए अग्नाशय के कैंसर का ख़तरा बढ़ा सकती हैं.

वैज्ञानिकों के अनुसार अगर वज़न कम रखने वाली जीवन शैली अपनाई जाए और खान-पान का ध्यान रखा जाए तो इस ख़तरे को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है.

अमरीका के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान ने नए शोध में पाया है कि डायबटीज़ में ली जाने वाली इंसुलिन और हारमोन को रोकने के लिए बढ़ी हुई प्रतिरोधक क्षमता से कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है.

संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि उनके शोध में पता चलता है कि खान-पान की स्वस्थ आदतें और संतुलित रहन-सहन से अग्नाशय के कैंसर के ख़तरे को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है.

अमरीकी मेडिकल एसोसिएशन की पत्रिका में इस शोध का विवरण प्रकाशित किया गया है.

इस शोध में इससे पहले हुए शोधों के इस नतीजे की पुष्टि हुई है जिनमें कहा गया था कि दूसरी श्रेणी की डायबटीज़ अग्नाशय के कैंसर से संबंधित हो सकती है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह संभव है कि इंसुलिन की सामान्य के बजाय ज़्यादा मात्रा लेने से अग्नाशय कैंसर के तत्वों की उत्पत्ति हो जाए.

शोधकर्ताओं ने फिनलैंड में धूम्रपान करने वाले 29 हज़ार 133 पुरुषों का अध्ययन किया और उनके मामलों का अध्ययन 16 साल तक किया गया.

जिन लोगों में ग्लूकोज़ और इंसुलिन की ज़्यादा मात्रा थी उन्हें अग्नाशय के कैंसर का ज़्यादा ख़तरा पाया गया.

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन की पुष्टि करने के लिए कुछ और शोध की ज़रूरत होगी.

इन वैज्ञानिकों ने पत्रिका में लिखा है कि वज़न कम करने वाली गतिविधियों के ज़रिए ग्लूकोज़ और इंसुलिन को घटाने की जीवन शैली से यह ख़तरा काफ़ी हद तक कम हो सकता है.