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मंगलवार, 13 दिसंबर, 2005 को 08:41 GMT तक के समाचार

800 प्रजातियों के लिए ख़तरे की घंटी

शोधकर्ताओं ने दुनिया भर में उन स्थानों का विवरण तैयार किया है जहाँ दुर्लभ प्रजाति के जानवर और पेड़ पौधों के लुप्त होने का ख़तरा पैदा हो गया है.

यह सूची पर्यावरणवादियों के एक दल ने तैयार की है जिसमें लगभग 800 प्रजातियों का विवरण है जिनके बारे में उनका कहना है कि अगर तुरंत उपाय नहीं किए गए तो ये प्रजातियाँ लुप्त हो सकती हैं.

इन 800 प्रजातियों में से ज़्यादातर सिर्फ़ एक ही स्थान पर पाई जाती हैं और वो हैं उष्णकटिबंधीय क्षेत्र.

राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी में इन वैज्ञानिकों ने अपना शोध अध्ययन लिखा है जिसमें इनमें से कुछ स्थानों में इन प्रजातियों की संरक्षा के लिए उपाय करने पर एक हज़ार डॉलर प्रतिवर्ष तक का ख़र्च हो सकता है.

इस शोधकर्ता दल के संयोजक स्टुअर्ट बुशर्ट ने बीबीसी से कहा, "इनमें से अधिकतर प्रजातियाँ एक-एक स्थान पर रहती हैं और उन पर मानव गतिविधियों का बहुत असर होने की संभावना है."

"इन प्रजातियों की संरक्षा के लिए क़दम उठाना ही सिर्फ़ एक मात्र उपाय नहीं है बल्कि अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो इनका लुप्त होना लगभग निश्चित है."

यह अध्ययन पर्यावरण और वन्य जीव क्षेत्र के 13 जाने-माने संगठनों ने मिलकर किया है जिनमें लंदन की ज़ूलोजिकल सोसायटी, कंज़रवेशन इंटरनेशनल और अमेरिकन बर्ड कंज़रवेंसी भी शामिल हैं.

इन संगठनों ने 'द अलायंस फ़ॉर ज़ीरो एक्सटिंशन' नाम के एक महासंघ के तहत यह अध्ययन किया है.

इस अध्ययन में 595 ऐसे स्थानों का विवरण तैयार किया गया जहाँ कोई न कोई प्रजाति 'लुप्त होने के ख़तरे' में है. कुछ ऐसे भी स्थान हैं जहाँ एक से ज़्यादा ऐसी प्रजातियाँ हैं.