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गुरुवार, 24 नवंबर, 2005 को 16:15 GMT तक के समाचार

'दिमाग़ कचरा जमा करना अच्छा नहीं'

अक्लमंद वही माना जाता है जिसे ज़्यादा से ज़्यादा बातें पता हों लेकिन अब वैज्ञानिक आगाह कर रहे हैं कि ऐसा नहीं है.

एक ताज़ा वैज्ञानिक शोध में बताया गया है कि जानकारी को नज़रअंदाज़ करने से दिमाग़ पर कम ज़ोर पड़ता है.

नेचर पत्रिका में छपे इस शोध में कहा गया है कि कुछ याद रखने का संबंध इस बात से है कि आपने उस पर कितना ध्यान दे रहे हैं.

जिस व्यक्ति को ज़्यादा बातें याद हैं इसका मतलब है कि उसकी दिलचस्पी ज़्यादा चीज़ों में है.

अमरीका की ऑरेगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि फ़ालतू बातों को दरकिनार करके मतलब की बात पर ग़ौर करने से दिमाग़ में सूचनाएँ कम जगह घेरती हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि अक्सर उन्हीं लोगों को मौक़े पर बात याद नहीं आती जो अपने दिमाग़ में ग़ैर-ज़रूरी जानकारियाँ भरते रहते हैं.

लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि हर चीज़ में दिलचस्पी रखने वाले और ज़रूरी-ग़ैर ज़रूरी का ज़्यादा फर्क़ नहीं करने वाले लोग अधिक रचनाशील होते हैं.

ऑरेगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कुछ लोगों से कहा कि वे तस्वीर के अंदर सिर्फ़ लाल रंग से बनी तस्वीर को देखें और उसके अलावा किसी अन्य चीज़ पर ध्यान न दें.

उनके दिमाग़ की स्कैनिंग करके देखा गया कि वे लाल रंग की तस्वीर को याद रखने में कितने सक्षम हैं.

बाद में देखा गया कि इन लोगों को कितना याद है तो पता चला कि जो लोग गैर ज़रूरी जानकारी को दिमाग़ में जाने से फ़िल्टर कर सके वही लाल रंग की अधिक से अधिक तस्वीरों को याद रख सके.

वैज्ञानिकों का संदेश स्पष्ट है कि सूचना क्रांति के इस दौर में जानकारी इतनी उपलब्ध है कि आप किसी हाल में उसे अपने दिमाग़ में नहीं रख सकते इसलिए अच्छा यही होगा कि फालतू बात को नज़रअंदाज़ कर दिया जाए.