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सोमवार, 21 नवंबर, 2005 को 13:53 GMT तक के समाचार

भारत में बढ़ा एड्स का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनएड्स ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि कुछ भारतीय राज्यों में एड्स संक्रमण की दर तो स्थिर हो गई है लेकिन कई अन्य राज्यों में अभी भी ख़तरा बना हुआ है.

इस रिपोर्ट के अनुसार अभी भी गर्भवती महिलाओं को संक्रमण का ख़तरा बहुत अधिक बना हुआ है.

वैसे रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में एचआईवी वायरस से प्रभावित लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है.

एड्स संक्रमण चिंताजनक स्तर तक पहुँचा

यह रिपोर्ट दुनिया भर में सोमवार को जारी की गई.

भारत में 51 लाख लोग एचआईवी वायरस से संक्रमित हैं.

यूएनएड्स के अनुसार दक्षिण और पश्चिमी राज्यों तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में संक्रमण की दर में स्थिरता आई है.

लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे ग़रीब और सघन जनसंख्या वाले उत्तरी भारत के राज्यों में गर्भवती महिलाओं में संक्रमण का ख़तरा बहुत अधिक है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि औद्योगिक राज्यों तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र और उत्तर पूर्वी राज्यों नागालैंड और मणिपुर में एक प्रतिशत से अधिक महिलाओं में एड्स के वायरस पाए गए.

यूएनएड्स का कहना है कि इन महिलाओं को वायरस उनके पति से ही मिल रहा है और अब इसका दायरा शहरी इलाक़ों के बाहर भी बढ़ रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन पुरुषों को एड्स वेश्याओं से असुरक्षित यौन संबंधों के कारण हुआ है.

वर्ष 2003 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार कर्नाटक की 14 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश की 19 प्रतिशत वेश्याओं को एड्स संक्रमित पाया गया.

मैसूर में किए गए एक सर्वेक्षण में 26 प्रतिशत वेश्याओं को एड्स संक्रमित पाया गया. इनमें से 14 प्रतिशत को अपने ग्राहकों के साथ नियमित रुप से कंडोम का प्रयोग करती हैं और 91 प्रतिशत अपने पतियों या साथियों के साथ कभी कंडोम का उपयोग नहीं करतीं.

शिक्षा का लाभ

कोलकाता के रेड लाइट एरिया में किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि सुरक्षित यौन संबंध की शिक्षा देने से एचआईवी संक्रमण को कम किया जा सकता है.

सोनागाछी में कंडोम का प्रयोग 85 प्रतिशत बढ़ गया है जिससे 2004 में एड्स संक्रमण की दर 2001 के 11 प्रतिशत की तुलना में घटकर 4 प्रतिशत हो गई.

लेकिन मुंबई में चूंकि इस तरह की शिक्षा नहीं दी गई इसलिए वहाँ वेश्याओं के बीच अभी भी संक्रमण दर 52 प्रतिशत से कम नहीं हुई है.

रिपोर्ट में भारत में भी नशे की लत वालों के बीच इंजेक्शन के ज़रिए और फिर शारीरिक संबंधों के कारण एड्स के बढ़ते ख़तरे को रेखांकित किया गया है.