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बुधवार, 28 सितंबर, 2005 को 13:59 GMT तक के समाचार

माँ चिंतित तो बच्चा चिंतित

जिन बच्चों की माताएं गर्भ के दौरान बहुत तनावग्रस्त रहती हैं उनके तनाव और चिंताग्रस्त होने की संभावना बढ़ जाती है.

ये बात पता लगाई है ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने जिनका मानना है कि तनाव का हार्मोन कॉर्टिसोल, गर्भ में पहुंच कर बच्चे को प्रभावित कर सकता है जिसके दूरगामी परिणाम संभव हैं.

ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के एक अनुसंधान दल ने पाया कि गर्भ के अंतिम महीनों में मां के तनाव का उसके बच्चे के कॉर्टिसोल के स्तर से सीधा संबंध था.

तनाव के असर

जानवरों पर इसतरह के अध्ययन पहले हो चुके हैं जिनसे पता चलता है कि गर्भ के दौरान तनाव अधिक होने से, शरीर का तनाव प्रतिक्रिया तन्त्र प्रभावित होता है. यही वह तन्त्र है जो तनाव के हार्मोन कॉर्टिसॉल के स्तर का नियमन करता है.

लेकिन अभी तक वैज्ञानिक ये सिद्ध नहीं कर पाए थे कि इंसान भी उसी तरह प्रभावित होते हैं.

न्यूयॉर्क के रॉचैस्टर विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक डॉ टॉमस ओ कॉनर ने ब्रिटन के ब्रिस्टल विश्वविद्यालय और लंदन के इम्पीरियल कॉलेज के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर 10 साल की उम्र के 74 बच्चों पर अध्ययन किया.

तनाव के हार्मोन का स्तर जांचने के लिए इन बच्चों की लार के नमूने सुबह के समय और फिर दिन में तीन बार इकट्ठे किए गए जब वो स्कूल में थे.

इन बच्चों की माताओं ने एक प्रश्नपत्र दस साल पहले भरा था जब वे गर्भवती थीं. इसमें उनसे तनाव और चिंता संबंधी सवाल पूछे गए थे.

तनाव कम करना

अनुसंधान करने वालों ने माताओं के प्रश्नपत्र और बच्चों की लार से मिले तनाव के स्तर की तुलना की.

जिन बच्चों की लार में तनाव के हार्मोन की मात्रा अधिक पाई गई उनकी माताओं ने गर्भ के दौरान अधिक तनाव की शिकायत की थी.

डॉक्टर ओ कॉनर कहते हैं,"ये नतीजे इस बात का सबूत हैं कि माँ के तनाव का, बच्चे के तनाव प्रतिक्रिया तंत्र पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है."

वे बताते हैं कि बच्चों और वयस्कों पर हुए बहुत से अध्ययन से पता चलता है कि कॉर्टिसोल हार्मोन के बढ़े हुए स्तर का अवसाद और चिंता से सीधा संबंध है.

उन्होंने कहा,"हमारे अनुसंधान से शायद ये भविष्यवाणी करना संभव हो कि किस बच्चे में किशोरावस्था में पहुँचकर ऐसे लक्षण पैदा हो सकते हैं."

लेकिन इस क्षेत्र में अभी और अनुसंधान की ज़रूरत है. क्योंकि कई और तत्व भी हैं जो बच्चे के तनाव स्तर को प्रभावित करते हैं जैसे उसका व्यक्तित्व और उसका परिवेश.

नेशनल चाइल्ड बर्थ ट्रस्ट की जिलियन फ़्लैचर कहती है," इस क्षेत्र में और जाँच की ज़रूरत है. हम गर्भवती महिलाओं को ये बताकर और चिंतित नहीं करना चाहते कि उनके तनाव का बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है."

जिलियन फ़्लैचर कहती हैं कि गर्भवती महिलाएं गर्भ, जन्म देने और शिशु पालन के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करके तनाव और चिंता को कम कर सकती हैं.