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सोमवार, 12 सितंबर, 2005 को 22:53 GMT तक के समाचार

ब्रह्मांड में धमाके से वैज्ञानिक उत्साहित

ब्रह्मांड के दिखने वाले हिस्से में हुए एक धमाके ने दुनियाभर के खगोलशास्त्रियों का ध्यान आकर्षित किया है. अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के एक उपग्रह की नज़र पिछले सप्ताह इस धमाके पर गई.

धमाके से जो रोशनी हुई, उसे नासा के स्विफ़्ट नामक उपग्रह ने देखा. इसे गामा-किरणों में धमाका भी कहा जाता है.

इस धमाके में कुछ मिनटों के अंतराल पर ही इतनी ऊर्जा निकलती है जितनी ऊर्जा सूर्य से उसके जीवनकाल में अभी तक नहीं निकली होगी.

चार सितंबर 2005 को स्विफ़्ट उपग्रह की निगाह में यह धमाका आया जो तीन मिनट तक चला. खगोलशास्त्रियों का मानना है कि यह धमाका एक विशाल तारे का अंत हो सकता है.

माना जा रहा कि यह धमाका जिस 'विशाल तारे' में हुआ. उसने अपनी यात्रा क़रीब साढ़े 12 अरब साल पहले शुरू की थी.

ब्रिटेन में कण भौतिकशास्त्र और अंतरिक्ष विज्ञान शोध परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रोफ़ेसर कीथ मेसन का कहना है कि इस नई घटना से तारों के बारे में और जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी.

खगोलशास्त्री सौरमंडल में हुए इस धमाके को लेकर इसलिए भी उत्साहित हैं क्योंकि यह ब्रह्मांड के उन तारों में हुआ है, जिनकी उत्पति सबसे पहले हुई थी.

दरअसल तारे बड़े पैमाने पर रसायनिक तत्व पैदा करते हैं. जिनके बिना न तो ग्रह ही अस्तित्त्व में रह सकते हैं और न ही जीवन.

वैज्ञानिकों का आकलन है कि अगर भविष्य में इस तरह के और धमाके हुए तो खगोलशास्त्रियों को यह पता लगाने में आसानी होगी कि पहला तत्व कैसे बना था.