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शुक्रवार, 26 अगस्त, 2005 को 12:39 GMT तक के समाचार

ममता गुप्ता और महबूब ख़ान
लंदन

हँसाने वाली गैस क्या होती है?

प्रश्न: बिशनपुर, समस्तीपुर बिहार से सुरेन्द्र कुमार ने जानना चाहा है कि लाफ़िंग गैस क्या होती है, क्या इसे सूंघने से व्यक्ति सचमुच हँसने लगता है.

उत्तर: लाफ़िंग गैस या हंसाने वाली गैस का वैज्ञानिक नाम है नाइट्रस ऑक्साइड. ये एक रंगहीन और गंधहीन गैस है जिसकी खोज एक अँग्रेज़ वैज्ञानिक जोज़फ़ प्रीस्टली ने 1793 में की थी. इसके बाद ब्रिस्टल के न्यूमैटिक इंस्टिट्यूट के हम्फ़्री डेवी ने इसके कुछ प्रयोग किए और पाया कि जो लोग इसे कुछ देर सूंघते हैं वो हंसने लगते हैं. उन्ही ने इसका नाम रखा लाफ़िंग गैस.

अगले 40 सालों तक इस गैस का इस्तेमाल मनोरंजन के लिए ही होता रहा. अमरीका में दाँतों के एक डॉक्टर होरेस वैल्स ने एक प्रदर्शन के दौरान देखा कि इस गैस को सूंघने वाले को चोट लगी लेकिन दर्द की अनुभूति नहीं हुई. उन्होंने इसका प्रयोग दाँत निकालने में किया जो किसी हद तक कामयाब रहा लेकिन चिकित्सा जगत ने उसे पूरी तरह सफल नहीं माना.

सार्वजनिक अपमान होने से उन्होने आत्महत्या कर ली. उनकी मृत्यु के डेढ़ सौ साल बाद नाइट्रस ऑक्साइड को बेहोश करने वाली दवा के रूप में दांतों के इलाज में प्रयोग किया जाने लगा.

रैटल स्नेक

प्रश्न: रैटल स्नेक क्या होता है. कहाँ पाया जाता है और कितना ज़हरीला होता है. ये सवाल है सोनबे पलामू, झारखंड से रंजय कुमार राज का.

उत्तर: इसे यह नाम इसलिए मिला है क्योंकि जब ये रेंगता है तो इसकी पूँछ खड़खड़ाती है. हालाँकि ये ज़हरीला होता है लेकिन आक्रामक नहीं होता और हमला तभी करता है जब उसे ख़तरा महसूस हो. रैटल स्नेक आमतौर पर छिपे रहते हैं और मुश्किल से दिखाई देते हैं.

एक वयस्क रैटल स्नेक का वज़न एक किलो से कुछ कम होता है और इसकी लम्बाई 38 से 40 इंच और मोटाई 8 से 9 इंच होती है. इनकी औसत आयु 12 से 18 साल होती है लेकिन जंगल में ये 22 से 25 साल तक जी लेते हैं.

ये उत्तरी अमरीका में पाये जाते हैं. ये रात के समय शिकार करते हैं. इनके ज़हर में पाचक ऐन्ज़ाइम भी होते हैं जो इनके शिकार को इनके निगलने से पहले ही विघटित करने लगते हैं.