शनिवार, 13 अगस्त, 2005 को 04:50 GMT तक के समाचार
न्यूयॉर्क से सलीम रिज़वी
पर्यटन की अब कोई सीमा नहीं रह गई है, यहाँ तक कि धरती से भी परे जाया जा सकता है.
अब आकाश से आगे भी जाया जा सकता है. और अंतरिक्ष में पर्यटन का इरादा रखने वाले लोगों के लिए अब जल्द ही ऐसा करना मुमकिन भी हो सकेगा.
अंतरिक्ष की सैर का ख़्वाब पूरा करने के लिए अमरीका में भारतीय मूल के एक अमरीकी उद्योगपति चिरंजीव कथूरिया ने अंतरिक्ष में पर्यटन के के लिए कनाडा में अंतरिक्ष यान बनाने वाली एक कंपनी कनेडियन एरो के साथ मिलकर प्लैनेट स्पेस नाम की एक कंपनी बनाई है.
लेकिन अंतरिक्ष की इस अनोखी सैर करने का खर्च जानने के लिए ज़रा दिल थाम लीजिए. एक यात्री का किराया होगा ढाई लाख डॉलर या सवा करोड़ रूपए.
लेकिन कथूरिया कहते हैं,"अंतरिक्ष पर्यटन के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है, जैसे- जैसे टेक्नोलोजी का इस्तेमाल बढ़ेगा इस तरह की अंतरिक्ष यात्रा सस्ती ही होती जाएगी और आम लोगों में दिलचस्पी बढ़ेगी जिससे मुनाफ़ा बढ़ेगा."
प्रशिक्षण
एक साल के भीतर ही इस यात्रा के लिए लोगों को चुना जाएगा जिन्हें चुने गए लोगों को कनाडा के जॉर्जिया बे इलाक़े में स्थित अंतरिक्ष केंद्र में प्रशिक्षण दिया जाएगा.
पहले एक साल तक इंटरनेट के ज़रिए प्रशिक्षण दिया जाएगा जिसके बाद उड़ान से एक महीना पहले अंतरिक्ष केंद्र में यात्रियों को ख़ास प्रशिक्षण दिया जाएगा.
इसमें यात्रियों को शून्य ग्रेविटी यानी गुरूत्वाकर्षणहीन स्थिति में रहने का भी प्रशिक्षण होगा और यान में यात्रा के लिए भी तैयार किया जाएगा.
उम्मीद है कि 2007 तक यात्री अंतरिक्ष की सैर कर सकेंगे.
तीन यात्री
एक यान में एक समय में केवल दो यात्री और एक पायलट यात्रा करेंगे.
अंतरिक्ष में सफ़र करने के लिए किसी व्यक्ति को रॉकेट वैज्ञानिक या पॉयलट होना ज़रूरी नहीं है.
इस योजना में सहयोगी कंपनी कनेडियन एरो के अध्यक्ष जेफ़ शीरिन यात्रियों के चयन के बारे में कहते हैं कि दो प्रकार के अंतरिक्ष यात्रियों का चयन किया जाएगा.
वे कहते हैं,"एक तो पायलट के लिए, जिसकी चयन प्रक्रिया और प्रशिक्षण में कड़े मापदंड होंगे. वहीं पर्यटकों के लिए चयन में आसान प्रक्रिया और प्रशिक्षण होगा."
उत्साह
कथूरिया का कहना है कि काफ़ी संख्या में लोगों ने इस सफ़र पर जाने में दिलचस्पी दिखाई है.
पिछले 10 वर्षों से हवाई जहाज़ उड़ा रहे न्यूयॉर्क में रहनेवाले पायलट जो गैम्बल कहते हैं," इस तरह के मौक़े ज़िंदगी में एक ही बार मिलते हैं. मैं तो अभी से हीस यात्रा का प्रशिक्षण लेने के लिए तैयार हूँ."
समझा जा रहा है कि शुरू में उद्योगपति और नामी-गिरामी लोग अंतरिक्ष की सैर करेंगे जिनमें कुछ हॉलीवुड स्टार भी शामिल हो सकते हैं.
लियोनार्डो डि कैप्रियो ने हाल में इस तरह की अंतरिक्ष यात्रा पर जाने में अपनी दिलचस्पी दिखाई है.
कथूरिया के अनुसार भारत से भी कई लोगों ने दिलचस्पी दिखाई है.
यात्रा
अंतरिक्ष की सैर के लिए जो अंतरिक्ष यान लिए गए हैं वे 1943 में हिटलर के समय के जर्मनी में प्रयोग किए गए V-2 रॉकेटों की डिज़ाईन और तकनीक पर आधारित हैं लेकिन इन्हे अत्याधुनिक टेक्नोलोजी से बेहतर बनाया गया है.
इसके इंजन की शक्ति 57 हज़ार पाउंड है, जो कि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्ष यान के रॉकेटों के बराबर है.
योजना के अनुसार अंतरिक्ष यान कनाडा के जॉर्जिया बे इलाके से उड़ान भरेंगे और धरती से 100 किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में पहुंचकर यात्री कोई चार मिनट के लिए भार-विहीन हो जाएँगे.
इसी समय यान का इंजन भी बंद हो जाएगा और वह अंतरिक्ष में तैरने लगेगा.
क़रीब 50 मिनट की इस पूरी यात्रा के बाद यान वापस जॉर्जिया बे से कोई पांच मील दूर ग्रेट लेक नामक झील में उतरेगा.
इन अंतरिक्ष यात्रियों को खास किस्म के कपड़े दिए जाएँगे जो यात्रा के बाद वह अपने साथ यादगार के तौर पर ले जा सकेंगे.
पहला अंतरिक्ष पर्यटन
डॉक्टरी और एमबीए की डिग्री के साथ शिकागो में बसे चिरंजीव कथूरिया अंतरिक्ष पर्यटन के क्षेत्र में पहले भी सुर्खियों में आ चुके हैं.
कथूरिया की मीरकॉर्प नामक कंपनी ने सन 2000 में पहली बार एक अमरीकी उद्योगपति डेनिस टीटो को अंतरिक्ष में पर्यटन यात्रा के लिए उड़ान पर भेजकर इतिहास रचा था.
इसके बाद कथूरिया अंतरिक्ष पर्यटन के लिए किसी साझीदार की तलाश थी और उन्होंने हाथ मिलाया कनेडियन एरो से जो किसी ऐसे उद्योगपति की तलाश में थी जो अंतरिक्ष के कार्यक्रमों में पैसा लगाने को राज़ी हो जाए.
कथूरिया की कंपनी नासा के लिए अंतरिक्ष में सैटेलाइटों की मरम्मत और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सटेशन के लिए सामान ढोने का भी काम करना चाहती है.
नासा अब निजी कंपनियों को भी अंतरिक्ष के कामों में शामिल करना चाहती है.
नासा के एक अधिकारी माइकल ब्रोकस का कहना है,"निकट भविष्य में नासा द्वारा निजी कंपनियों से ऐसे प्रस्ताव माँगे जाएंगे जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सटेशन के लिए सामान लाने-ले जाने में काम आ सकें. इस तरह के ठेके अमरीकी कंपनियों को दिए जाएंगे."
कथूरिया इसके अलावा भारतीय अंतरिक्ष संगठन इसरो के साथ भी मिलकर काम करना चाहते हैं.