गुरुवार, 30 जून, 2005 को 23:30 GMT तक के समाचार
यूनेस्को का कहना है कि हिंद महासागर में सूनामी की चेतावनी देने वाली प्रणाली लगाने पर सहमति बन गई है.
पेरिस में इस संबंध में एक बैठक चल रही थी जिसमें समद्र विज्ञानी और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल थे.
बातचीत के बाद हिंद महासागर में भूकंप और समुद्र की हलचल को समझने संबंधी उपकरणों का पूरा जाल बिछाने पर सहमति बन गई है.
इस तरह का एक सिस्टम प्रशांत महासागर में काम कर रहा है.
उम्मीद की जा रही है कि हिंद महासागर में इस प्रणाली के लगने से दिसंबर 2004 में आई सूनामी जैसी तबाही से होने वाली क्षति को रोका जा सकेगा.
उम्मीद की किरण
छह महीने पहले जब सूनामी लहरों के आने का नज़ारा शायद ही कोई भूला होगा. पहाड़ों की ऊंचाई वाली तेज़ लहरें और उससे मची तबाही के बाद अब लोग धीरे धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं.
दुनिया भर के लोगों का मानना है कि प्रशांत महासागर के बाद हिंद महासागर में भी सूनामी चेतावनी प्रणाली लगने से ऐसी तबाही से बचा जा सकेगा.
समुद्र में लगे उपकरण किसी भी हलचल की जानकारी वैज्ञानिकों को देते हैं जिनका संपर्क लगातार एमरजेंसी सेवाओं से होता है.
नई प्रणाली के तहत एमरजेंसी सेंटरों का पूरा नेटवर्क होगा जो किसी आपात स्थिति में लोगों को पहले जानकारी दे सकेगा.
सूनामी लहरों को रोकना तो मुश्किल है लेकिन समय रहते चेतावनी मिलने पर इससे होने वाली क्षति को कम ज़रुर किया जा सकता है.