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शनिवार, 21 मई, 2005 को 16:57 GMT तक के समाचार

बंदरों की नयी नस्ल का पता चला

दक्षिणी तंज़ानिया के पहाड़ों में बंदरों की एक ऐसी नस्ल का पता लगा है जिसके बारे में अभी तक जीव वैज्ञानिक कुछ नहीं जानते थे.

बंदरों की ये नस्ल लुप्तप्राय है और अब इस नस्ल के लगभग एक हज़ार बंदर ही बचे हैं.

इस नस्ल को हाईलैंड मैंगाबी कहा जाता है और ये पेड़ों पर रहते हैं.

साइंस पत्रिका में इस बंदर की खोज की ख़बर सबसे पहले छापी गई है और इसे खोज निकालने वाले वैज्ञानिकों में टॉम बुतिन्स्की भी शामिल हैं.

उन्होंने बीबीसी ऑनलाइन को बताया, "इसे देखकर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया और चेहरे पर मुस्कुराहट फैल गई."

अद्भुत खोज

अमरीकी वैज्ञानिकों की ये टीम दुंदुलू के जंगलों में सांजे मानगाबी बंदरों पर शोध करने गई थी. एक और टीम दक्षिणी तंज़ानिया के जंगलों में लुप्तप्राय बंदरों की खोज में लगी हुई थी.

डॉक्टर बुतिन्स्की ने कहा कि शायद ये बंदर इस इलाक़े में सैकड़ों बरसों से रह रहे हैं.

शोधकर्ताओं की एक और टीम को क़रीब एक साल पहले इस बंदर के बारे में पता लगा था.

न्यूयॉर्क स्थित वाइल्ड लाइफ़ कंज़रवेशन सोसाइटी को टिम डैवनपोर्ट को पता लगा कि स्थानीय लोग इस नस्ल के बंदर को किपुंजी कहते हैं.

ख़तरा

इससे एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि भले ही जीव वैज्ञानिकों को इसका पता न लगा हो, स्थानीय लोग इस नस्ल के बंदरों को बहुत अच्छे तरीक़े से पहचानते हैं.

ये बंदर काफ़ी बड़ा होता है और एक बहुत अलग क़िस्म की बारीक भौंकने जैसी आवाज़ निकालता है.

इस नस्ल का अस्तित्व इसलिए ख़तरे में पड़ गया है क्योंकि ग़ैरक़ानूनी तौर पर जंगल काटे जा रहे हैं.

इसीलिए कई लोगों ने यहाँ के राष्ट्रीय अभयारण्य के इलाक़े में विस्तार की माँग की है.