बुधवार, 11 मई, 2005 को 04:56 GMT तक के समाचार
अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संगठनों के एक समूह ने चेतावनी दी है कि डॉक्टरों और नर्सों के विकासशील देशों से विकसित देशों की ओर हो रहे पलायन का काफ़ी बुरा असर हो रहा है.
ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन के नेतृत्व में कनाडा, अमरीका और दक्षिण अफ़्रीकी एजेंसियों की ओर से विकासशील देशों से अपील की गई है कि वे इस समस्या का हल ढूँढ़ने के लिए क़दम उठाएँ.
एजेंसियों के अनुसार अफ़्रीका जैसे देशों पर इसका काफ़ी बुरा असर हो सकता है.
पिछले कुछ वर्षों में अमरीका और ब्रिटेन जैसे देशों में डॉक्टरों और नर्सों की बड़ी ज़रूरत रही है और विकासशील देशों के चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग इन ज़रूरतों को पूरा करते आ रहे हैं.
पिछले तीन सालों में भारत, फ़िलीपीन्स और दक्षिण अफ़्रीका से लगभग 40 हज़ार नर्सें काम की तलाश में ब्रिटेन आई हैं.
ये युवा और नवप्रशिक्षित चिकित्साकर्मी अपने देश में मिलने वाली तनख़्वाहों की अपेक्षा यहाँ मिलने वाली अच्छी रक़म के लालच में इन देशों का रुख़ करते हैं.
मगर अक़सर ये चिकित्साकर्मी जिन देशों से आते हैं वहाँ इन लोगों की ज़रूरत कहीं ज़्यादा रहती है बनिस्बत इन देशों के.
अभियान
ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चला रहा है और वो भी ख़ासतौर पर अफ़्रीकी देशों में.
उदाहरण के लिए घाना में दो करोड़ लोगों की देखरेख के लिए सिर्फ़ डेढ़ हज़ार डॉक्टर हैं और वहाँ डॉक्टर बनने वाले दो तिहाई लोग देश छोड़ देते हैं. नतीजा ये कि इन देशों में और ज़्यादा लोग मौत का शिकार हो रहे हैं.
एचआईवी एड्स जैसे रोगों का सामना करने के लिए अरबों डॉलर ख़र्च किए जा रहे हैं मगर उनका फ़ायदा इन डॉक्टरों के वहाँ नहीं होने की वजह से हो ही नहीं पा रहा है.
इस सप्ताह के अंत में जिनेवा में राष्ट्रकुल देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक होने वाली है और ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन वहाँ ये मुद्दा उठाने की तैयारी कर रहा है.
ऐसी सभी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ विकसित देशों से अपील कर रही हैं कि वे विकासशील देशों से आने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के भरोसे रहना अब बंद करें और अपने देश में ही लोगों को प्रशिक्षित करें.
इसके अलावा वे चाहते हैं कि विकसित देश विकासशील देशों के डॉक्टरों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करें कि वे अपने ही देश में रह कर काम करें.