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गुरुवार, 05 मई, 2005 को 06:58 GMT तक के समाचार

भारत के दो नए उपग्रह अंतरिक्ष में

भारत का रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट कार्टोसैट-1 और हैमसैट को आज अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया गया.

राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की उपस्थिति में श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी सी-6 से इसे अंतरिक्ष में भेजा गया.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) ने कहा है कि उपग्रहों को सफलता पूर्वक कक्षा में स्थापित किया गया है.

इस अवसर पर राष्ट्रपति के अलावा आंध्रप्रदेश के राज्यपाल सुशील कुमार शिंदे, इसरो के चेयरमैन जी माधवन नायर, और इसरो के पूर्व चेयरमैन जी कस्तूरीरंगन सहित कई महत्वपूर्ण लोग उपस्थित थे.

मानचित्र और रेडियो के लिए

पीएसएलवी सी-6 ने अपने प्रक्षेपण के 18 मिनट बाद पहले कार्टोसैट-1 को कक्षा में स्थापित किया और इसके 30 सेकेंड बाद हैमसेट को.

कार्टोसैट-1 भारत द्वारा अंतरिक्ष में स्थापित अब तक का सबसे भारी उपग्रह है. इसका वज़न 1560 किलोग्राम है.

यह भारत का ग्यारहवाँ रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट है.

कार्टोसैट-1 का उपयोग मुख्यरुप से मानचित्र आदि बनाने के काम में आएगा. अधिकारियों के अनुसार इसकी मदद से मौजूदा नक्शों को सुधारा जा सकेगा और नए नक्शे बनाए जा सकेंगे.

जबकि अपेक्षाकृत छोटे हैमसैट का उपयोग हैमरेडियो जैसी ग़ैरपेशेवर रेडियो सेवाओं के लिए किया जाएगा.

250 करोड़ रुपए की परियोजना लागत वाला कार्टोसैट-1 पाँच साल तक काम करेगा.

जबकि हैमसैट की जीवन अवधि दो सालों की है. यह सैटेलाइट पूरे दक्षिण एशिया में काम करेगा. यह इसरो का पहला उपग्रह है जो किसी कार्य विशेष के लिए अंतरिक्ष में भेजा गया है.