सोमवार, 14 मार्च, 2005 को 05:19 GMT तक के समाचार
वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (डब्लूडब्लूएफ़) यानी विश्व वन्य निधि ने चेतावनी दी है कि हिमालय की हिमनदियाँ तेज़ी से पिघल रही हैं.
इससे आने वाले दिनों में करोड़ों लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है.
डब्लूडब्लूएफ़ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत, चीन और नेपाल में पहले बाढ़ का सामना करेगा जो आने वाले दशक में सूखे में तब्दील हो जाएगा.
ध्रुवों के अलावा किसी जगह इतना पानी सिर्फ़ हिमालय की हिमनदियों में है और इससे एशिया की सात बड़ी नदियों में पानी बना रहता है.
डब्लूडब्लूएफ़ का कहना है कि यदि जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए तत्काल क़दम उठाए जाएँ तो हिमनदियों का पिघलना एक हद तक रुक सकता है जो हर वर्ष बढ़ता जा रहा है.
डब्लूडब्लूएफ़ ग्लोबल क्लाइमेट चेंज प्रोग्राम की निदेशक जेनिफ़र मॉर्गन का कहना है, "हिमालय में हिमनदियाँ जिस तेज़ी से पिघल रही है उससे पहले तो नदियों में जलस्तर बढ़ेगा लेकिन कुछ दशकों बाद यह स्थिति बदल जाएगी और नदियों का जल स्तर घटने लगेगा."
उन्होंने कहा कि इसकी वजह से पश्चिमी चीन, उत्तरी भारत और नेपाल के करोड़ों लोगों को पर्यावरणीय दिक़्क़तों का सामना करना पड़ सकता है.
हिमनदियों का पिघलना
गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, मेकांग, थैनलविन, यांग्तज़े और येलो रिवर जैसी बड़ी नदियों में हिमनदियों से पानी आता है.
इन नदियों में हिमखंड प्रतिवर्ष पिघलकर 10 से 15 मीटर पीछे हटता जा रहा है.
भारत में गंगोत्री में हिमनदी 23 मीटर पीछे जाती जा रही है.
भारत, नेपाल और चीन में जो लोग हिमालय से दूर रहते हैं इन नदियों के पानी के भरोसे ही होते हैं.
यदि इन नदियों का जल स्तर बढ़ जाता है तो लाखों लोगों के जीवन मरण का सवाल पैदा हो जाएगा. इसी तरह बड़ी संख्या में किसानों का जीवन प्रभावित होगा.
उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से आने वाले 20 वर्षों में पृथ्वी का तापमान दो डिग्री तक बढ़ सकता है.
डब्लूडब्लूएफ़ की रिपोर्ट का कहना है कि भारत, चीन और नेपाल में जलवायु परिवर्तन का असर दिखाई दे रहा है.
जेनिफ़र मॉर्गन का कहना है कि लंदन में जलवायु परिवर्तन पर हो रहे दो बैठकें हो रही हैं जिसमें 20 औद्योगिक देशों के मंत्री भाग ले रहे हैं. इस बैठक में मंत्रियों को इस संभावित त्रासदी पर गंभीरता से विचार करना होगा.