शनिवार, 19 फ़रवरी, 2005 को 18:58 GMT तक के समाचार
वैज्ञानिकों का कहना है कि मस्तिष्क के बड़े होने का बुद्धि से कोई संबंध नहीं है.
हमारा दिमाग हमारे पूर्वजों के दिमाग के मुकाबले में तीन गुना बड़ा है लेकिन इतिहास गवाह है कि इससे मानव ज़्यादा सूझवान नहीं बना है.
वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर विलियम कैलविन का कहना है कि प्राचीनकाल में जब मनुष्य के दिमाग का आकार बढ़ा तब भी औज़ार बनाने की तकनीक ख़ास बेहतर नहीं हुई.
उनका कहना है कि जब मानव दो लाख साल पहले अफ़्रीका में मौजूद था और उसके मस्तिष्क का आकार आज के मानव जैसा था तब भी विचार शक्ति में कोई विशेष बदलाव नहीं आया.
ये बदलाव डेढ़ लाख साल बाद आना शुरु हुआ.
उस समय भाषा का अविष्कार, तर्क करने की सूमझ-बूझ, संगीत आदि का विकास हुआ.
इसलिए प्रोफेसर विलियम कैलविन का कहना है कि मस्तिष्क के आकार को छोड़कर अन्य कारण रहे होंगे जिनसे इन सब क्षेत्रों में विकास हुआ.
उनका ये भी कहना है कि अब तो मनुष्य के दिमाग का आकार घट रहा है.