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शनिवार, 08 जनवरी, 2005 को 03:38 GMT तक के समाचार

सूनामी के कारण पीने के पानी का संकट

दिसंबर में सूनामी के कारण हिंद महासागर के कई द्वीपों पर जल आपूर्ति व्यवस्था सालों या यों कहें कि दशकों के लिए प्रभावित हो गई है.

इसका मतलब यह हुआ कि इन द्वीपों पर रहने वाले लोग पीने के पानी के लिए बाहरी सहायता पर निर्भर करेंगे.

कई प्रभावित इलाक़ों से आ रही रिपोर्टों से पता चला है कि सूनामी लहरों के कारण यहाँ के कुओं और चट्टानों की दरारों में खारा पानी भर गया है. द्वीपों पर रहने वाले लोग पीने के पानी के लिए इन्हीं पर निर्भर रहते हैं.

मालदीव के कई इलाक़े इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हो सकते हैं. यहाँ रहने वालों लोगों को अब बारिश का इंतज़ार करना पड़ेगा जिससे ये खारा पानी वहाँ से निकल जाए.

यहाँ के लोग पीने के पानी के लिए चूना पत्थर की चट्टानों के बीच भू-जलाशयों पर निर्भर करते हैं.

समस्या

ब्रितानी भू-जल वैज्ञानिक जॉन चिल्टन ने बीबीसी को बताया, "इन द्वीपों पर चूना पत्थर वाली चट्टानें हैं, दरारें हैं और मिट्टी भी बहुत कम हैं. सूनामी के कारण पानी का रेला यहाँ जितनी तेज़ी से आया उतनी तेज़ी से यहाँ से नहीं जाएगा."

उन्होंने बताया कि सूनामी के जैसी तबाही से ऐसे जलाशय नष्ट हो जाते हैं और इनके पानी को पीने के लायक बनने में वर्षों लग सकते हैं.

ज़्यादातर इलाक़ों में मानसूनी जलवायु है इसलिए इन छोटे जलाशयों को बनने में वर्षों लग सकते हैं लेकिन यहाँ के पानी को पीने के लायक बनने में और ज़्यादा समय लग सकते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) से एक विशेषज्ञ पहले ही मालदीव पहुँच चुका है ताकि वहाँ के लोगों को साफ़ पानी पीने का रास्ता बताया जा सके.

सरकारी अधिकारियों के अनुसार तीन लाख के जनसंख्या वाले इसे देश की एक तिहाई आबादी सूनामी के कारण प्रभावित हुई है.

यहाँ के लोगों को पीने का साफ़ पानी मिल सके, इसके लिए काम पहले से ही चल रहा है. लेकिन आशंका यही है कि यहाँ के लोगों को लंबे दौर में इसके बुरे नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं.

जॉन चिल्टन के अनुसार यहाँ के लोगों के लिए एक रास्ता ये भी हो सकता है कि वे अपने घर की छतों पर बारिश का पानी इकट्ठा करें और फिर उसे इस्तेमाल करें.

लेकिन ये तरीक़ा उन इलाक़ों में कारगर नहीं है जहाँ बड़े पैमाने पर तबाही हुई है. मालदीव के अलावा श्रीलंका में भी कुछ इलाक़ों में ऐसी समस्या है लेकिन वहाँ पानी का खारापन निकालने वाली मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है.