शुक्रवार, 24 सितंबर, 2004 को 08:17 GMT तक के समाचार
बेल्जियम में कैंसर से पीड़ित एक महिला कीमोथेरेपी के कारण बच्चे पैदा करने में अक्षम हो गई थी लेकिन वहाँ के डॉक्टरों ने इसके लिए एक अनोखा इलाज ढूँढ़ निकाला.
बेल्जियम के डॉक्टरों का कहना है कि दुनिया में ऐसा पहली बार हुआ है. डॉक्टरों ने सात सात पहले क़्वार्दा टौरियट के अंडाशय से ऊत्तकों को निकालकर उसे सुरक्षित रखा.
पिछले साल डॉक्टरों ने 32 वर्षीय इस महिला के गुर्दे में स्थित झिल्लीदार कोशिका (पेल्विस) में इसे प्रत्यारोपित किया.
बाद में यह महिला गर्भवती हुई और पिछले हफ़्ते उसने ब्रसेल्स में एक बच्चे को जन्म दिया.
शोधकर्ताओं का कहना है कि कैंसर से पीड़ित अन्य युवतियों का भी इसी तरह इलाज होना चाहिए.
उनका कहना है कि इस इलाज से हज़ारों महिलाएँ गर्भवती हो सकती हैं जो कैंसर पीड़ित होने के कारण बच्चे पैदा करने में अक्षम हो गई हैं.
ब्रसेल्स के कैथोलिक विश्वविद्यालय में इस शोधकार्य का नेतृत्व करने वाले प्रोफ़ेसर जैक़ डोनेज़ ने बताया, "हमारी खोज से उन हज़ारों युवतियों को लाभ मिलेगा जिनका अंडाशय उनके कैंसर पीड़ित होने के कारण बेकार हो जाता है."
समस्याएँ
लेकिन इस तरह के इलाज में कई समस्याएँ भी हैं. हर महिला के शरीर में जन्म के समय से ही लाखों अंडे होते हैं जो समय के साथ-साथ नष्ट होते रहते हैं.
उम्र बढ़ने के साथ-साथ जब महिलाओं में मासिक धर्म बंद होने लगता है उस समय अंडे भी बहुत कम बचे रहते हैं जिसके कारण वे गर्भवती नहीं हो पाती.
इस तरह के इलाज से इस स्थिति से बचा जा सकता है यानी कम अंडों की ग़ैर मौजूदगी में भी महिलाएँ गर्भवती हो सकती हैं.
दरअसल इस तकनीक में अंडाशय के 1-2 मिलीमीटर स्तर को खोलकर उसे कई टुकड़ों में काट दिया जाता है.
फिर इसे तरल नाइट्रोजन में शून्य से 200 डिग्री सेंडीग्रेड कम के तापमान पर जमाया जाता है.
इस ऊत्तक को बाद में शरीर के किसी भी हिस्से में प्रत्यारोपित किया जा सकता है और यह काम भी करता है.
इसके बाद अंडों को निकालकर इनका कृत्रिम गर्भाधान में इस्तेमाल हो सकता है.
लेकिन बेल्जियम की इस महिला के मामले में ऊत्तक को फ़ैलोपियन ट्यूब में किनारों पर प्रत्यारोपित कर दिया गया जिसके कारण यह महिला सामान्य रूप से गर्भवती हो गई.