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गुरुवार, 26 अगस्त, 2004 को 15:04 GMT तक के समाचार

ज़्यादा टीवी देखने से पीठ में दर्द

वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार लंबे समय तक टेलीविज़न देखने या कंप्यूटर पर काम करने से पीठ की महत्वपूर्ण माँसपेशियों को नुक़सान पहुँच सकता है.

ऑस्ट्रेलिया में शोधकर्ताओं ने ऐसे 19 युवाओं पर परीक्षण किया जिन्होंने आठ हफ़्ते बिस्तर पर बिताए.

न्यू साइंटिस्ट्स पत्रिका के अनुसार इन सभी की पीठ की वो माँसपेशियाँ कमज़ोर हो गईं जो रीढ़ की हड्डी को सहारा और सुरक्षा देती हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय तक टेलीविज़न देखने और कंप्यूटर पर काम करने पर भी यही असर हो सकता है और पीठ के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है.

उन्होंने कहा है कि इससे होने वाला दर्द ठीक वैसा ही होता है जैसा कि चोट लगने पर होता है.

इससे पहले हुए शोध में कहा गया था कि ज़्यादातर मामलों में पीठ के निचले हिस्से में उन माँसपेशियों में दर्द हो सकता है जो मेरुदंड को सहारा देती हैं या फिर उन माँसपेशियों में जो जाँघों की हड्डियों को जोड़े रखती हैं.

कई बार तो दोनों ही जगह दर्द होता है.

हालाँकि डॉक्टर कहते हैं कि 15 प्रतिशत मामलों में दर्द की वजह भारी सामान उठाना या कोई और चोट हो सकती है.

लेकिन ज़्यादातर मामलों में डॉक्टरों को पता ही नहीं चलता कि दर्द की वजह क्या होती है.

इस ताज़ा शोध से पता चलता है कि लंबे समय तक एक ही जगह बैठे या लेटे रहने से भी यह तकलीफ़ हो सकती है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि आठ हफ़्ते बिस्तर पर लेटे रहने वालों की माँसपेशियों को जिस तरह का नुक़सान पहुँचा, वह वैसा ही था जैसा कि पीठ के निचले हिस्से में दर्द की स्थिति में होता है.

एक शोधकर्ता जूली हाइड्स का कहना है कि इस मसले का हल सिर्फ़ यह नहीं है कि आप उठकर टहल लें.

उनका कहना है कि कई मामलों में तो माँसपेशियाँ छह हफ़्तों के व्यायाम के बाद भी ठीक नहीं हो सकीं.