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सोमवार, 16 अगस्त, 2004 को 13:33 GMT तक के समाचार

माँस कम खाने से पानी की बचत

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी देशों में जिस तरह का खाना खाया जा रहा है उसके चलते आने वाले पीढ़ियों के लिए पानी की कमी हो सकती है.

उनका कहना है कि मांस और डेयरी उत्पादों की माँग बढ़ रही है और इसके लिए पानी की बहुत अधिक ज़रुरत होती है.

विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि लोगों को माँस खाने की बजाए फल-सब्ज़ी ज़्यादा खाना चाहिए.

स्टॉकहोम में चल रहे पानी सप्ताह में इस बात की चेतावनी दी जाने वाली है कि यह स्थाई विकास के लिए अच्छा नहीं है.

दरअसल समान मात्रा में खाद्य पदार्थ जुटाने के लिए खाद्यान्नों की बजाए जानवरों को ज़्यादा पानी की आवश्यकता होती है.

पानी पर सम्मेलन

स्वीडन में स्टॉकहोम इंटरनेशलन वॉटर इंस्टिट्यूट (सीवी) हर साल पानी पर एक सम्मेलन का आयोजन करता है.

इस साल यह सम्मेलन 15 से 21 अगस्त के बीच हो रहा है.

सीवी का कहना है, "इस समय दुनिया में 84 करोड़ लोग या तो कुपोषण के शिकार हैं या फिर उन्हें पर्याप्त खाद्य सामग्री नहीं मिल पा रही है...2025 तक इसमें और वृद्धि होने के आसार हैं. जिस रफ़्तार से जनसंख्या बढ़ रही है उसके चलते आने वाले दिनों में पानी की कमी मूल और बड़ी समस्या होगी."

इस सम्मेलन में प्रस्तुत किए जाने वाले एक शोधपत्र में कहा गया है, "पिछले कई दशकों में आबादी की तुलना में खाद्य उत्पादन नहीं बढ़ सका है और दुनिया के बहुत बड़े हिस्से में पानी की कमी हो रही है."

दूसरी ओर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुपोषण को 'अघोषित आपातकाल' का नाम दिया है और कहा है कि दुनिया भर में होने वाली बच्चों की मौतों में से आधी कुपोषण के कारण होती है.

सीवी के कार्यकारी निदेशक एंड्रेस बर्नटेल का कहना है, "जितना पानी हम उपयोग में लाते हैं उसका 70 प्रतिशत सिंचाई में लगता है, और यह बारिश से मिलने वाले पानी के अतिरिक्त है."

उनका कहना है कि कुल मिलाकर हमें अनाज उगाने के लिए पानी की खपत को कम करना होगा.

जानवरों के लिए पानी

उधर जानवर भी खाद्यान्न पर निर्भर होते हैं और उनमें से बहुतों को चारागाह में रखना होता है और चारागाह में पानी की ज़रुरत बहुत अधिक होती है.

बर्नटेल कहते हैं, "विकसित देशों में और कुछ विकासशील देशों में माँस की माँग लगातार बढ़ती जा रही है."

उनका कहना है कि वे किसी को अच्छा खाना खाने से रोकना नहीं चाहते लेकिन पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका में जिस तरह का खाना खाया जाता है उससे आने वाली पीढ़ी के लिए भोजन जुटाना कठिन हो जाएगा.

वे कहते हैं कि पानी की समस्या उससे अधिक गंभीर है जितना हम मान रहे हैं.

उनका कहना है कि आने वाले दिनों में कई देशों को पानी का आयात करना होगा.

एक दिलचस्प आँकड़ा देते हुए वे कहते हैं, "ऑस्ट्रेलिया में पानी की कमी है लेकिन उनको यह जानकर आश्चर्य हो रहा है कि वे माँस के रुप में पानी का निर्यात कर रहे हैं."