मंगलवार, 03 अगस्त, 2004 को 09:40 GMT तक के समाचार
अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक अंतरिक्ष यान छोड़ा है जो सूर्य के सबसे क़रीबी ग्रह बुध तक की यात्रा करेगा.
यह अंतरिक्ष यान सात वर्षों में बुध तक पहुँचेगा और एक वर्ष तक बुध की परिक्रमा करते हुए काम करेगा.
इस यान में न तो कोई अंतरिक्ष यात्री है और न ही इसे कोई नाम दिया गया है.
बुध ग्रह के लिए यह दूसरा अंतरिक्ष यान है और 30 सालों में ये पहला बुध अभियान है.
इस यान को पहले सोमवार को छोड़ने की योजना थी लेकिन बादल और तेज़ हवाओं के कारण इसे 24 घंटे विलंब से फ़्लोरिडा के केप कैनेवरल से छोड़ा जा सका.
लंबी यात्रा
अपनी 7.9 अरब किलोमीटर की यात्रा के दौरान यह अंतरिक्ष यान पहले पृथ्वी की एक परिक्रमा करेगा, शनि की दो और बुध की तीन.
इसके बाद जाकर वह बुध की कक्षा में स्थापित हो सकेगा.
वैज्ञानिकों के अनुसार यह यान 2011 में बुध तक पहुँचेगा.
वैज्ञानिकों की उम्मीद है कि 42.7 करोड़ डॉलर की इस योजना से बुध के बारे में कई रहस्यों का पर्दाफ़ाश हो सकेगा.
यह यान बुध की सतह, उसकी बनावट, उसके भौगोलिक इतिहास, वातावरण और चुंबकीय प्रभावों का अध्ययन करेगा.
बुध ग्रह ऐसा ग्रह है जिसके बारे में अब तक सबसे कम जानकारी मिल सकी हैं.
आग और बर्फ़
बुध के बारे में सबसे अधिक उत्सुकता उसकी सतह पर बर्फ़ होने की संभावना को लेकर है.
बुध एक ऐसा ग्रह है जिसकी भूमध्य रेखा पर तापमान 450 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है लेकिन सूर्य की दूसरी ओर बर्फ़ भी हो सकती है.
पृथ्वी पर लगे रेडियो टेलीस्कोप ने जो तस्वीरें ली हैं उससे पता चलता है कि बुध के एक ध्रुव पर बर्फ़ हो सकती है और वहाँ का तापमान -184 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है.
लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का मानना है वह जमी हुई सीलिका हो सकती है या फिर कुछ और.
अंतरिक्ष यान के सौर पैनलों में ऐसे सेरामिक और आइनों का उपयोग किया गया है जो 500 डिग्री सेल्सियस तक गर्मी झेल सकता है.
इसमें कुल सात ऐसे उपकरण हैं जो इस ग्रह के साथ तालमेल बिठाकर काम कर सकते हैं.
इससे पहले 1973 में अमरीका ने 'मैरिनर 10' नाम का एक यान बुध भेजा था जिसने बुध की तीन परिक्रमाएँ की थीं. लेकिन वह यान ने बुध की सिर्फ़ 45 फ़ीसदी सतह की ही तस्वीरें ले सका था.