बुधवार, 30 जून, 2004 को 00:55 GMT तक के समाचार
एक महिला ने पहली बार अंडाशय के टिश्यू के ट्रांसप्लांट के बाद गर्भ धारण किया है. कैंसर के उपचार से पहले उनका अंडाशय निकाल लिया गया उसे उपयुक्त तापमान में रखा गया और उपचार के बाद उसे फिर ले आरोपित कर दिया गया.
इससे कैंसर पीड़ित ऐसे हज़ारों रोगियों को उम्मीद की किरण दिख रही है जिनकी जनन क्षमता उपचार के बाद ख़त्म हो गई थी.
महिला को 1997 में हॉजकिन्स लिंफ़ोमा से पीड़ित पाया गया फिर कीमोथेरैपी और रेडियोथेरैपी से पहले ही उनका अंडाशय निकाल दिया गया.
कैंसर का पूरी तरह उपचार हो जाने के बाद पिछले साल उनका अंडाशय फिर से आरोपित कर दिया गया.
इसके 11 महीने बाद उन्होंने गर्भ धारण किया.
बर्लिन में चल रहे यूरोपीय फ़र्टिलिटी सम्मेलन में हिस्सा ले रहे वैज्ञानिक इस ख़बर से काफ़ी उत्साहित हैं.
ब्रसेल्स के यूनिवर्सिटी कैथोलिक डि लोवेन के डॉक्टर उस महिला की निगरानी कर रहे हैं. महिला के अक्तूबर में एक लड़की को जन्म देने की संभावना है.
कीमोथेरैपी से पहले उस महिला के अंडाशय के कुछ टिश्यू निकाल लिए गए थे और उचित तापमान पर उन्हें रखा गया था.
उनका एक अंडाशय शरीर में ही रहने दिया गया.
अप्रैल 2003 में जब उस महिला को कैंसर से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया गया तो अंडाशय का टिश्यू पहले से मौजूद अंडाशय के नीचे ही फिर से उनके शरीर में आरोपित कर दिया गया.
चार महीने बाद सामान्य प्रक्रिया में अंडाणुओं का बनना शुरू हो गया.
अभी ये स्पष्ट नहीं है कि जिस अंडाणु से गर्भ धारण हुआ है वह आरोपित अंडाशय से निकला था या पुराने अंडाशय ने फिर से काम करना शुरू कर दिया.